Haunted Road Story In Hindi: बुलेट की सवारी | हौंटेड रोड स्टोरी

Haunted Road Story In Hindi 2022 | हौंटेड रोड  स्टोरी इन हिंदी 2022 का अंश: वहां दूर-दूर तक देखने पर कोई भी नहीं था, ना कोई घर नहीं कोई गावं। मैंने संजय से पूछा कि हम यहाँ क्यों रुके हैं। वह चुप रहा; उसके दिमाग में कुछ चल रहा था। वह भ्रमित दिखाई दिया और कहा, "मुझे लगता है कि हम गलत रास्ते में है और मुझे नहीं पता कि अब हम कहाँ हैं।" मैं हैरान होकर इधर-उधर देखने लगा। ऐसा लग रहा था कि हाईवे पर यह एक जंक्शन है, जिसके आसपास सिर्फ सनाटा पसरा था।...

Haunted Hotel Horror Story Hindi: Bhootiya Hotel Kahani को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

....दोस्तों इस Haunted Road Story In Hindi को लास्ट तक जरुर पढ़ें क्यूंकि यह एक बहुत इंट्रेस्टिंग और सच्ची डरावनी भूतिया होटल की स्टोरी है | अइ होप की आपको यह Real Haunted Road Kahani जुरूर पसंद आएगा...

Bullet-Ki-Sawari-Hindi-Haunted-Road-Trip-Story-Real-Highways-in-India-Bhutiya-Kahani
Bullet Ki Sawari Haunted Road Trip Story In Hindi


Haunted Road Story In Hindi: Bullet Ki Sawari
हौंटेड रोड स्टोरी इन हिंदी: बुलेट की सवारी



यह घटना 1998 के आसपास हुई थी। मेरे कॉलेज की पढाई अभी ख़त्म ही हुई थी और मैं अपनी पहली नौकरी की तलाश कर रहा था, मूल रूप से मैं बेरोजगार था। मेरा दोस्त संजय, जिसे हम सब से पहले एक अच्छी नौकरी मिल गई थी, अपनी पहली सैलरी से एक पुरानी एनफील्ड बुलेट बाइक ख़रीदा था। 


शिरडी के साईं बाबा के भक्त होने के कारण वह अपनी पहली बाइक से मुंबई से शिरडी की यात्रा करना चाहता था। इसलिए, उसने मुझे इस यात्रा पर उसके साथ चलने को बोला। ऐसे भी मेरा कुछ उस ट्रिप में खर्च नहीं होने वाला था सारा खर्च वो करने वाला था इसलिए बिना कुछ सोचे मैं हाँ कर दिया, ऐसे भी यह उस समय के लिए एडवेंचर राइड थी और ऐसे एडवेंचर राइड्स को भला कोई कैसे मना कर दे। मैंने पहले कभी बाइक पर इतनी लंबी यात्रा नहीं की थी, और न ही कभी बुलेट पर, और न ही कभी रात में कभी बाइक से कही गया था, इसलिए मैं अंदर से बहुत उत्साहित था।


संजय काफी सालों से बाइक चलाना जानते थे और वह एक अनुभवी बीके राइडर थे और हम जिस रास्ते पर जाने वाले थे, उससे वह काफी अच्छी तरह वाकिफ थे। वह कभी-कभी अपने पिता के ट्रक को उनके ट्रांसपोर्ट बिज़नस में मदद करने के लिए उस रास्ते पर ट्रक तक चला चुके थे। उस समय मुंबई-नासिक मार्ग कमजोर दिल वालों के लिए नहीं था, खासकर रात में चलने वालों के लिए। भले ही यह नेशनल हाईवे था, लेकिन यह काफी संकरा था और  उस रोड में हरतरफ बड़े-बड़े गड्ढे थे और रोड पर स्ट्रीट लाइट ना के बराबर थी। खासकर कसारा घाट में। पहाड़ों के बिच से घुमावदार खड़ी चढ़ाई पार करके ही आप दूसरी तरफ जा सकते थे। उस समय के सबसे अधिक दुर्घटना संभावित मार्गों में से एक था यह रोड।


मुझे अभी एक्साक्ट डेट या टाइम याद नहीं है, लेकिन उस समय वीकेंड जरूर रहा होगा। हमने शाम को अपनी यात्रा शुरू की और अधिकतम 1-2 बजे मॉर्निंग में  सूर्य उदय होने से पहले तक शिरडी पहुंचने की योजना बनाई ताकि हम मंदिर में सुबह की प्रार्थना में शामिल हो सकें। मुंबई से शिरडी के बीच की दूरी लगभग 250 किलोमीटर है और हमने अनुमान लगाया कि रात होने के कारण और उस रोड के ख़राब होने के कारण भी हम बुलेट को ज्यादा फ़ास्ट नहीं चला सकते और हमें वहां तक पहुंचने में कम से कम 7 घंटे लगेंगे।


मुझे जल्द ही एहसास हुआ कि मेरा दोस्त अपने अच्छे ड्राइविंग को लेकर थोड़ा अधिक आश्वस्त था क्योंकि वह जो करने जा रहा था वह पागलपन था। वह भारतीय ट्रक ड्राइवरों और गड्ढों से भरी सड़क पर एक ट्रक के हेडलाइट में आगे-आगे चलने वाला था। वह इसके लिए एक ट्रक ड्राईवर के साथ बातचीत करने गया, और ट्रक ड्राईवर भी यह काम करने के लिए मान गया। ट्रक की लाइट मुश्किल से हमसे 7-8 फीट आगे तक जा पा रही थी। मैं इस पूरी बात को लेकर थोड़ा नर्वस था।


हमने धीमी गति से चलने वाले ट्रक के आगे आगे चलकर धीरे-धीरे कसारा घाट सेक्शन को पूरा किया और लगभग 12. 30 बजे तक नासिक पहुँच गए। बहुत सख्त सीट के कारण अब तक मेरी पीठ में दर्द हो रहा था; नासिक पहुँचने में हमें 7 घंटे लग चुके थे और शिरडी पहुँचने के लिए अभी भी 100 किलोमीटर का ड्राइव बाकी था । सड़क किनारे एक शॉप में चाय और कुछ स्नैक्स खा कर खुद को तरोताजा करने के बाद, बॉडी को फ्री करने वाला एक्सरसाइज करने के बाद, हमने आगे बढ़ने का फैसला किया।


संजय इस एरिया के सभी सड़कों को जानता था क्योंकि वह कई सालों से इन सड़कों पर गाड़ी चला रहा था। मुझे खुद कोई जानकारी नहीं थी लेकिन मुझे अपने राइडिंग पार्टनर पर पूरा भरोसा था। जो लोग पहले कभी सड़क मार्ग से शिरडी गए हैं, उन्हें याद होगा कि शिरडी की ओर जाने के लिए हाईवे 45 से एक शार्प लेफ्ट कट लेना पड़ता है। नासिक से सड़कें अच्छी और चिकनी थीं और बाइक गड़गड़ाहट करते हुए चल रही थी। हम रात के अंधेरे में जिसमें चाँद की भी रौशनी नहीं थी, एक हाईवे पर 80 किमी/घंटा की तेज स्पीड से चल रहे थे।


सामने से पूरी तरह खाली रोड पर अब संजय पागलों की तरह गाड़ी चला रहा था। मुझे ऐसा फील हो रहा था की काश हम इसी तरह चुपचाप चलते रहे और फिर संजय अचानक बाइक को सड़क के किनारे ले गया और रुक गया। मैं हैरान होकर इधर-उधर देखने लगा कि हम बीच में ही क्यों रुक गए हैं। ऐसा लग रहा था कि हाईवे पर यह  एक जंक्शन है, जिसके आसपास सिर्फ सनाटा पसरा था। वहां दूर-दूर तक देखने पर कोई भी नहीं था, ना कोई घर नहीं कोई गावं। मैंने संजय से पूछा कि हम क्यों रुके हैं। वह चुप रहा; उसके दिमाग में कुछ चल रहा था। वह भ्रमित दिखाई दिया और कहा, "मुझे लगता है कि हम गलत रास्ते में है और मुझे नहीं पता कि अब हम कहाँ हैं।"


मैंने कहा "यार ऐसे कैसे हो गया ? अब हम क्या करें? क्या हमें पीछे मुड़ना चाहिए?"


जब हम उस सड़क के किनारे आगे क्या करना है के बारे में चर्चा करने में व्यस्त थे,  तभी एक पुलिस वैन चुपचाप हमारे पास आ गई और रुक गई। एक आदमी ने बायीं ओर से अपना सिर बाहर निकाला और हमें अपने पास बुलाया। उसका चेहरा एक मफलर से छिपा हुआ था, जो पूरे चेहरे के चारों ओर लिपटा हुआ था और बस आँखें दिख रही थीं। हालाँकि अँधेरा इतना गहरा था की हमें और कुछ पता नहीं चल पा रहा था । उसने एक स्थानीय बोली में पूछा "क्या हुआ? तुम दोनों इस समय यहाँ क्यों रुके हो?"। स्थानीय बोली को अच्छी तरह से समझने के बाद मैंने उन्हें बताया कि कैसे हम शिरडी शहर पहुंचना चाहते हैं और किसी तरह से हम लेफ्ट टर्न से चूक गए और अब हम आधिकारिक तौर पर खो गए हैं।


उन्होंने हमें एक सेकंड से अधिक समय तक देखा और फिर कहा "भाऊ (भाई) यह संगमनेर है, आप लोगों ने शिरडी के लिए उस मोड़ से बहुत आगे तक की यात्रा कर ली है।"


हम दोनों एक-दूसरे को हैरानी से देख रहे थे और सोच रहे थे कि ऐसा कैसे हो गया। और मैं सोच रहा था कि संजय  को इस भूल की भनक क्यों नहीं लगी? हमने पुलिस वाले से पूछा कि क्या हमें पीछे मुड़ना चाहिए। उसने मना कर दिया, उस रास्ते पर मत जाओ यह एक लंबा रास्ता है उसने कहा। आगे एक मोड़ की ओर इशारा करते हुए उन्होंने हमें वहां से बाईं ओर जाने के लिए कहा जो हमें जल्दी से हमारे गंतव्य तक ले जाएगा। हमने उसे धन्यवाद दिया और अपनी बाइक पर वापस आ गए और नए रास्ते पर चल पड़े। 


उस समय लगभग 2:00 बज रहा होगा। हम रात को खाली सुनसान सड़कों से गुजर रहे थे और शायद ही कभी सड़क के दोनों तरफ कोई घर दिखता था। वहां था तो बस एक ही चीज़ अंतहीन जंगल और उसके बिच से गुजरता वह सड़क। ऐसा लग रहा था कि रास्ता कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन हम चलते रहे और इसके अलवा हमारे पास कोई आप्शन भी नहीं था। अंत में, हम किसी तरह सुबह लगभग 7 बजे शिरडी शहर पहुँचे, सुबह की प्रार्थना से पूरी तरह चूक गए। हम सीधे एक होटल के कमरे में गए और बेड पर गिर पड़े और दोपहर तक सोते रहे। हमें 7 घंटे जगह लगभग 13 घंटे लग गए थे।


सीट रैश के अलावा बाकी की यात्रा असमान थी,  उतने देर लगातार पीछे बैठे रहने के कारण मेरे पीठ में दर्द हो चूका था। हमने यह भी मान लिया कि हमने जो गलती की है वह सिर्फ एक मानवीय भूल थी और इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं सोचा। यह सब एक अच्छे साहसिक कार्य की तरह लग रहा था। कोई नुकसान नहीं हुआ। सब कुछ ठीक था।लेकिन यह नहीं होना था।


इस यात्रा के चौथे दिन, मैं ड्राइंग रूम में अपने सोफे पर लेटा हुआ था। आंखें बंद थीं लेकिन मैं कुछ सोच-सोचकर जाग जा रहा था। मुझे अचानक घुटन का अहसास होने लगा, मैं अपनी आँखें भी नहीं खोल पा रहा था, और कोई  मुझे जोर से दबा रहा था। मेरी आँखें बंद होने के कारण मेरी आँखों के सामने बस एक डार्क स्क्रीन थी। लेकिन फिर मैंने अचानक दो आदमियों को मुझे पकड़े हुए देखा, मेरी आँखें अभी भी बंद थीं  यह ऐसा था की जैसे मेरे दिमाग ने एक दृश्य बनाई हो। 

दोनों आदमी पुलिस की खाकी वर्दी में थे, मोटी मुड़ी हुई मूंछों के साथ। मध्यम ऊंचाई के और नार्मल डील-डॉल के । धूप से झुलसे काले चेहरे। पागलों जैसा हंसते हुए वे मुझे जोर से दबाए हुए थे। उनमें से एक ने मेरा दाहिना हाथ पकड़ा और मेरी ओर झुक गया और मेरे कान में फुसफुसाया "उस रात तुम लोगों को सही रास्ता भुलाने में बहुत मज़ा आया" और ये बोल कर वे दोनों फिर से पागलों की तरह हँसने लगे जैसे कि यह बात उनके लिए बहुत बड़ा मज़ाक हो। उस समय, मैं अभी भी उनकी मजबूत पकड़ में था और खुद पर कुछ नियंत्रण हासिल करने के लिए मैं बहुत कोशिश कर रहा था। उस ख़राब और डरवाने पल में, मैंने हताशा में अपने परिवार के देवता और अपने गुरु के नाम का जाप करना शुरू कर दिया और उनकी पकड़ से बाहर आने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी।


उस समय मुझे ऐसा लग रहा था की मैं उनसे कई दिनों से लड़ रहा हूँ और ये सब कभी खत्म नहीं होने वाला लेकिन तभी अचानक उनकी पकड़ मिट चुकी थी। मेरा दिमाग अभी भी सदमे में था, और फिर मैंने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और इधर-उधर देखा। मैंने अभी जो देखा था और अनुभव किया था, उससे मैं अन्दर से बहुत डर गया था। मैं भ्रमित अवस्था में था और किसी तरह उठा और किचन की ओर गया और कुछ गिलास पानी पिया। मेरा दिमाग उन पलों को भूल नहीं पा रहा था जो अभी-अभी हुआ था। मेरे दिमाग में वो सब बातें बार-बार मूवी की रील की तरह चल रहीं थी। मैं इसका अर्थ निकालने की कोशिश किये जा रहा था।


मैं अब तक अपनी पूरी ताकत लगा देने कारण थका हुआ महसूस कर रहा था और ऐसा महसूस हो रहा था कि मैंने कोई भारी नशा किया हो। मेरा दिल बहुत जोरों से धड़क रहा था। मेरा दिमाग हालांकि जवाब ढूंढ रहा था और सोच रहा था कि अब क्या किया जाए। इससे मैं कैसे निपटूं? क्या यह सच में था या सिर्फ एक मतिभ्रम? उस समय मेरे पास इसे जानने का कोई तरीका नहीं था। 


लेकिन अचानक मुझपर हुए वह शक्तिशाली हमला मुझे वास्तविक लग रहा था और उसने मेरे कान में जो फुसफुसाया वह ठिठुरने वाला था। मैं बहुत डर चूका था और फिर अपने एक दोस्त को फोन किया और पूछा कि क्या मैं अभी तुरंत उसके घर आ सकता हूं, उन्होंने मेरी सारी बातें सुनी और फिर मुझे कहा ठीक है आप आ जाइए।


मैंने तुरंत ही एक ऑटो बुक की और उसके घर की ओर निकल पड़ा और एक घंटे के भीतर उनके दरवाजे पर था। उसके घर में अन्दर जाते ही मैंने उसे बताया कि अभी-अभी मेरे साथ क्या हुआ। और फिर मैं उसके घर ही कुछ दिन रुका, जब मैं उसके घर में था तभी यह घटना मेरे साथ 3 बार घटी और फिर मैं वहां से ही एक पुजारी के घर गया और उनको अपने साथ घटा सब कुछ बताया।


वह मेरी पूरी बात सुनने के बाद "हम्म" करके चले गये..." और कुछ सेकंड बाद आये और एक शब्द 'चकवा' कहा और मुस्कुराए, और कहा की चिंता मत करो यह ठीक हो जाएगा। इसके बाद, उन्होंने मुझे बाहर से एक ताजा नींबू और धूप का एक पैकेट लाने के लिए कहा। जैसा मुझे बताया गया था मैंने वैसा ही किया और उन्हें सारी चीजें लाकर दे दिया। 


कुछ देर एक छोटी सी वेदी पे प्रार्थना करने के बाद, उन्होंने नींबू पर कुछ सिंदूर लगाया। धुप  और अगरबत्ती के पूरे गुच्छा को जलाया और कुछ मंत्रों का उच्चारण किया जो मुझे समझ में नहीं आया। और फिर कुछ पूजा अनुष्ठान करने के बाद उन्होंने ने कहा आप अब घर जा सकते हैं। चिंता मत करो अब सब ठीक हो चूका है। मैं उनसे विदा लिया और उनके घर से बाहर कदम रखा, मुझे अब सब नार्मल लग रहा था, मुझे ऐसा फील हो रहा था जैसे मेरी सारी ताकत वापस आ गई हो और मुझे हल्का महसूस हुआ। मैंने राहत की सांस ली और अपने घर वापस आ गया।


बाद में, मुझे 'चकवा' शब्द से दिलचस्पी हो गई, जिसे मैंने पहली बार सुना था और कुछ जानकार लोगों से इसके बारे में पूछा। मुझे जो जानकारी मिली, वह यह था कि यह विशेष तौर पर अकेले सुनसान जंगल की सड़कों पर मिलती है या लोगों को दिखती है और अपने सम्मोहन शक्ति से या विभिन्न तरीकों से राहगीरों को चकमा देती है। और उन्हें उनकी मंजिल से भटका देती। उनके बारे में ज्यादा जान कर ऐसा लगता है कि वे लोगों के दुखों से सिर्फ आनंद प्राप्त करते हैं। आम तौर पर इन्हें उतना हानिकारक नहीं माना जाता है।


यह पूरा अनुभव शरीर को बरगलाने वाला दिमाग का एक मजबूत खेल हो सकता है या शायद कुछ और।


आपके दृष्टिकोण में वह क्या हो सकता है, हमारे साथ शेयर करना न भूलें, पढ़ने के लिए धन्यवाद। 


 Bhooton Ki Aapbiti Kahani: अँधेरी रात  | भूतों की आपबीती की कहानी को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें


अस्वीकरण (Disclaimer:): Haunted Road Story In Hindi: Bullet Ki Sawari यह मेरी कहानी नहीं है, यह कहानी हमारे एक रीडर के द्वारा भेजी गयी है, और यह भुतिया घटना उनके साथ ही एक  रोड ट्रिप के समय घटित हुआ था और मैं केवल वही बता रहा हूं जो उन्होंने मुझे बताया था।


👻💀🕱💀☠

.....

..... Haunted Road Story In Hindi: Bullet Ki Sawari  .....

Team Hindi Horror Stories


दोस्तों आपको ये Haunted Road Story In Hindi: बुलेट की सवारी कैसा लगा ये कमेंट में बताये | यदि आप इस तरह के Famous Road Trip Horror Stories in Hindi  | Indian Haunted Roads | Hindi Horror Kahaniya या Bhoot story in Hindi का animated विडियो देखना चाहते हैं, तो निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें | यदि आप ऐसे ही और इंडियन घोस्ट स्टोरीज या Story in Hindi Horror देखना चाहते है तो -  Dating Ghosts (click here) youtube channel को subscribe कर लें ताकि मैं आपके लिए और भी ऐसे ही Scary Stories in Hindi लेकर आ सकूँ|


Dating Ghosts | Hindi Horror Stories | Horror Stories In Hindi | real horror incidents in hindi, Bhoot Story In Hindi, horror short story in hindi, real bhoot story hindi, bhoot pret ki kahani, bhoot story, sacchi bhutiya kahani, daravni kahani, pret katha, bhut katha,



दोस्तों आपके पास भी कोई  Horror Story In Hindi Real Story, Horror Story Real In Hindi, Ghost Stories in Hindi, रियल घोस्ट स्टोरीज इन इंडिया इन हिंदी | रीडिंग हॉरर स्टोरी | रियल हॉरर स्टोरी हिंदी है तो हमारे साथ शेयर करें और ऐसे  ही रोचक,  Hindi Horror Stories पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें  हमारे  Newsletter section को, धन्यवाद् |


No comments:

Powered by Blogger.