डरावना स्केरी स्टोरी हिंदी: उजला भूत | Darawna Scary Story Hindi

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Ujla Bhoot Drawna Hindi Scary Story

Darawna Scary Story Hindi: Ujla Bhoot
डरावना स्केरी स्टोरी हिंदी: उजला भूत

किसी ने ट्रेन को रोकने के लिए आपातकालीन चैन खींची होगी, ऐसा मैंने सोचा, क्योंकि ट्रेन अचानक ही रुक गई।ट्रेन के अचानक रुकने से हम सभी आगे की ओर झुक गए।

मैं खडा हो गया और अब गतिहीन ट्रेन की खिड़कि से अपना सिर बाहर निकाल लिया। ज्यादातर यात्रियों की भीड़ ट्रेन के बाहर थी।

रेलवे पुलिस ने भी मौके पर पहुंचने में देर नहीं की।

ऐसा प्रतीत होता है कि कोई लाइन पार कर रहा था, और ट्रेन की चपेट में आ गया था। यह मेरे इच्छित गंतव्य से सिर्फ एक स्टेशन पहले था: बहरामपुर।


तभी किसी ने बोला कि शव अभी भी वहीं पड़ा हुआ है। मैं भी वहां जाकर देखने ही वाला था कि किसी ने मेरा हाथ मजबूती से पकड़ लिया। यह कोई और नहीं बल्कि वह साथी यात्री था जो मेरे साथ ही कोलकाता से बैठा था, और जिससे मैं अपनी चार घंटे की यात्रा के दौरान बातें कर रहा था।


"उस बेजान शरीर में देखने के लिए कुछ भी नहीं है। केवल बहुत सारा खून और कुछ कटे-फटे अंग हैं," उन्होंने कहा। "वह देख कर आप बहुत परेशान हो जायेंगे, मत जाइए उधर।"


मैंने अपनी उस शव को देखने की जिज्ञासा को छुपा लिया।


शाम के साढ़े चार बज रहे थे. मेरे साथी यात्री ने मुझे बताया कि वह भी बहरामपुर जा रहा है, इसलिए हमने एक वैन किराए पर ली, जो स्थानीय स्तर पर किराए के लिए उपलब्ध एकमात्र परिवहन था।


यात्रा के दौरान हम लगातार बातें करते रहे। कभी राजनीति के बारे में, कभी वर्तमान शिक्षा परिदृश्य के बारे में तो कभी यातायात व्यवस्था में होते एक्सीडेंट्स के बारे में। हालांकि, मैं अपने मन को उस बात को सोच्च्ने से नही हटा पा रहा था । मैं यहीसोच रहा था कि किसने अपना इतना कीमती जीवन खो दिया। मैं छब्बीस साल का था। जीवन में देखने के लिए बहुत कुछ है। मौत एक ऐसी चीज थी जिसके बारे में मैं सोचना ही नहीं चाहता था।


बहरामपुर की यह मेरी पहली यात्रा थी। एक मित्र ने मुझे अपने घर पर वीकेंड्स बिताने के लिए बुलाया था। मैंने सोचा था कि कोलकाता के इस भीड़-भाड और बिना फुरसत लाइफस्टाइल से बेहतर रहेगा। यह मेरे नीरस दैनिक जीवन में कुछ अच्छा फील करवाएगा ।


अंत में अपने दोस्त के घर पहुंचने पर, मैंने दुर्घटना या अपनी वैन यात्रा के बारे में कुछ भी नहीं बताने का फैसला किया। दरअसल, मैंने उस कैब की सवारी का आनंद लिया। ट्रेन में उस हादसे के अलावा पूरी यात्रा सुखद रही। मैं दुखद बातों पर चर्चा करके अपने दोस्त को दुखी नहीं करना चाहता था। अंकुश, मेरे कॉलेज का दोस्त है, और साथ ही वह एक अच्छा इंसान भी, और उसकी माँ (आंटी) उस पकवान के टेस्ट को लेकर चिंतित थी जो वह मेरे लिए तैयार कर रही थी। मैं उस शाम को थोडा भी खराब नहीं करना चाहता था, इसलिए भी मैंने कुछ नही कहा।


चूंकि मैं शहर में रहता था, वे चिंतित थे कि मुझे उनका ग्रामीण घर अच्छा लगेगा की नहीं, जहाँ लाइट बहुत ही कम रहती है, लेकिन मुझे वास्तव में उन तारों वाली रात में उनके घर की छत पर बैठकर, वहां के ग्रामीण वातावरण का मजा लेना, जहाँ ना तो शोरगुल था, नाही किसी भी प्रकार का भाग दौड़ बहुत ही अच्छा लगा। नारियल का दूध, ताजी सब्जियां और फल खाना, और उसके दोस्तों की उटपटांग बातें सुनना, काफी दिल को तसली देने वाला था।


उन्होंने मुझसे अंतहीन सवाल पूछे। मेरे काम के बारे में, मेरे परिवार और मेरे बारे में, जिसका जवाब देने में मुझे खुशी हुई। मैंने यथासंभव विस्तार से जवाब देने की कोशिश की। वे यह सुनकर प्रसन्न हुए कि मैं एक लेखक हूँ।


फिर उसके एक मित्र ने उस दुर्घटना का उल्लेख किया जिसमें उसी दोपहर एक अठारह वर्षीय लड़की की मौत हो गई थी।

अंकुश ने मुझसे कहा, "अरे, मुझे लगता है कि तुम वहीँ होंगे। क्या तुमने कुछ भी नहीं देखा?"


मैंने उन्हें वह सब कुछ बताया जो मैं जानता था, और अपनी चुप्पी का कारण भी बताया।


वह मेरा बात सुनकर जोर-जोर से हँसे, जैसे कि यह एक सामान्य घटना थी। अंकुश ने कहा कि वास्तव में यह कोई दुर्लभ बात नहीं। वे रेलवे लाइन पर होने वाले इस तरह के हादसों के काफी अभ्यस्त थे।

अंकुश फिर मेरे तरफ देख कर मुस्कुराया, और ताना मारते हुए मुझसे पूछा कि क्या मैं डरा हुआ हूं।


यह सुनते ही मुझे गुस्सा आ गया। मुझे इस तरह से डरपोक कहना और मेरे ऊपर डरा हुआ होने का आरोप लगाने  का कोई अधिकार उनके पास नहीं था।


उसके दोस्तों में से एक भुवन ने मुझसे कहा, "ठीक है, क्या आप उस घटना स्थल को देखने जा सकते है? अभी। अकेले? यदि आप यह कर सकते हैं, तो हम मान सकते हैं कि आप डरे हुए नहीं हैं।"


मैं, इस बात पर सहमत हो गया।


तदनुसार, हम तुरंत उस स्थान पर गए जहां दुर्घटना हुई थी, लेकिन जानबूझकर उस जगह से उचित दूरी बनाई रखी जहाँ ये हादसा हुआ था। उन्होंने मुझे उस जगह तक चलने की हिम्मत दी, जहां उस बच्ची को मारा गया था। वहां कुछ भी मुश्किल से दिखाई दे रहा था क्योंकि वहां केवल तारों के प्रकाश और आंशिक रूप से छिपे हुए चंद्रमा की रौशनी थी। और वहीँ पास का सिग्नल लाल चमक रहा था।


अंकुश के रोकने के बावजूद मैं आगे बढ़ने लगा। मेरे जैसे किसी व्यक्ति के लिए इस चीज़ को स्वीकार करना वाकई मुश्किल था। फिर भी, मैं उन्हें दिखाना चाहता था कि मैं वास्तव में एक बहादुर आदमी हूँ, और मैं उनकी मूर्खतापूर्ण हिम्मत को स्वीकार कर सकता हूँ।


अँधेरे में चलना मुश्किल था क्योंकि हर तरफ पत्थर बिखरे पड़े थे। मैंने पाया कि चलते-चलते मुझे पसीना आ रहा था। लेकिन यह एक चुनौती थी और मुझे बस जीतना था।


अचानक, मेरे सामने, मैंने एक छायादार सफेद वस्तु को ठीक उसी जगह पर कांपते हुए देखा जहां मैं जा रहा था। मैं एक पल के लिए रुक गया। यह एक मन का भ्रम हो सकता है, मैंने तर्क दिया। और मैं फिर आगे बढ़ने लगा। लेकिन, जैसे-जैसे मैं उस जगह के नजदीक जा रहा था सब कुछ साफ-साफ दिखने लगा। 

वहां एक सफेद रंग के कपडे में लिपटा व्यक्ति था। और वह छाया जैसा दिखने वाला व्यक्ति वहां कुछ कर रहा था। कौन था या क्या था? यह भ्रम था या...? मेरे मन मस्तिक में बस अब यही चल रहा था की मैं जो देख रहा वह इस दुनिया का नहीं है, मेरी रीढ़ से पसीना चल रही थी। मैं लगभग सदमे से मर ही गया क्योंकि किसी ने मेरे कंधे पर अचानक हाथ रखा। मैंने बस अपनी सांस रोक दी और अपनी आँखें बंद कर लीं।


उस धुंधली रोशनी में मैंने पाया कि यह कोई और नहीं बल्कि अंकुश था जो मेरा पीछा कर रहा था। वह भी वही देख रहा था जो मैं देख रहा था।


हम दोनों उधर और करीब जाकर देखे तो पाया कि वह एक बूढ़ा व्यक्ति था जो उस जगह को पानी से पोंछ रहा था। वहां न तो कोई शव था, ना कोई भूत प्रेत, वहां तो मृत लड़की का भी कुछ नहीं बचा था।


"ईतो रक्तो! - इतना खून!" वह बूढ़ा व्यक्ति चुपचाप अपने आप से बार-बार कह रहा था।


बाद में  अंकुश ने मुझे बताया कि वह स्टेशन मास्टर था, जिसके बेटे की इसी तरह पच्चीस साल पहले एक ट्रेन दुर्घटना में मौत हो गई थी। ऐसी ही एक ठंडी रात में, पुलिस अधिकारी उसका पीछा कर रहे थे और, बिना किसी चेतावनी के, एक ट्रेन वहां से क्रॉस कर रही थी जो उसके ऊपर से निकल गई। 

उस दुखद घटना के बाद, स्टेशन मास्टर मानसिक रूप से परेशान हो गया, और जब भी उस एरिया में इस तरह की दुर्घटना होती उनके सभी सबूत मिटाने के लिए वह हमेशा वहां चला जाता है। 

उस रात तो मेरा प्राण तो लगभग निकल ही चूका था।  


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