श्मशान घाट की कहानी | Shmashaan Ghaat Ki Kahani

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Shmashaan Ghaat Ki Asli Sacchi Darwani Hindi Story Kahani


Shmashaan Ghaat Ki Kahani
श्मशान घाट की कहानी

म सबने आज तक कई बार कुछ ऐसी जगहों के बारे में सुना है समझा है, जिसके बारे में लोग कहते हैं की रात में वहां मत जाना क्यूंकि रात में वहां भूत रहते हैं। अइ ऍम sure की आप सबने ऐसी किसी न किसी जगह के बारे में अपनी जिन्दगी में जरुर सुना होगा। ऐसे ही कहानियों और मान्यताओं से भरा हुआ है यह देश। आप किसी भी शहर की किसी भी गली में चले जाईये आपको भूतों से रिलेटेड एक डर की कहानी जरूर मिलेगी। 


यानी कि हम ऐसी जगहों की बात कर रहे हैं जिसके बारे में कई लोगों ने कई कहानियां बनाई हैं। एक ऐसे ही जगह के बारे में हम आज बात करेंगे। 


श्मशान घाट,  अइ ऍम sure की आप सबने इस शब्द को सुना होगा अइ ऍम sure की आप सब यह जानते होंगे कि शमशान घाट होता क्या है। अगर हम हमारी हिंदू संस्कृति की बात करें तो शमशान घाट एक बहुत ही इंपॉर्टेंट रोले प्ले करता है हमारी पूरी संस्कृति में।


कहते हैं की एक इंसान के पूरे जीवन का जो सफर होता है। वह इसी श्मशान घाट पर जाकर खत्म होता है जहां से उसे मुक्ति प्राप्त होती है। जहां से वह अपने जीवन का सारा कार्यकलाप छोड़कर परमात्मा को जा मिलता है। एक थ्योरी तो यह भी है जो यह बताती है कि भाई यह शमशान घाट जो है कितना महत्वपूर्ण है,  कितना पाक है कितना साफ है!! 


लेकिन! श्मशान घाट का एक और भी साइड और वह साइड है, उसका हॉरर साइड आप सबने यानि की हम सब ने अक्सर कई कहानियां सुनी होंगी। कब्रिस्तान के बारे में, श्मशान घाट के बारे में, ब्यूरियल ग्राउंड के बारे में अलग-अलग धर्म, अलग-अलग मान्यताएं और अलग-अलग कहानियां।


श्मशान घाट में रात को नहीं जाते। कब्रिस्तान से होकर रात को नहीं गुजरते। मैं सोचता हूं कि ऐसा क्यों है, तो बात करते हैं आज के हमारे उस श्मशान घाट के बारे में जो कि शायद पहाड़ों के बीच में जंगलों के बीच में नदियों के किनारे खो गया है। 


उत्तराखंड एक ऐसा राज्य जो अपनी बेहद खूबसूरत पहाड़ियां बेहद खूबसूरत जंगल और इन सारी चीजों की वजह से जाना जाता है। उत्तराखंड में एक छोटा सा कस्बा है, जिसका नाम है बैजरो। बैजरो एक बहुत ही छोटा सा कस्बा है बल्कि मैं कहूंगा मेरे ख्याल से वहां पर शायद 200-300 घर होंगे और सिर्फ एक सड़क है जो आपको एक जगह से दूसरी जगह पर कनेक्ट करती है और बीच में आता है यह छोटा सा कस्बा बैजरो! 


मैंने अपना सफर शुरू किया बैजरो। मैं ड्राइव करके जब बैजरो पहुंचा तब लगभग करीब शाम हो चुकी थी और शाम के करीब आसपास 4 या 5 बजे होंगे। मैंने वहां पर एक होटल ढूंढने की कोशिश की, लेकिन वह मुझे वहां मिला नहीं। तभी मेरी वहां पर एक लोकल गांव वाले से बातचीत हुई और मुझे अपने घर में जगह दी। रात में खाना खिलाया। हमने काफी बातें की और मैंने उनसे पूछा। इस श्मशान घाट के बारे में। 


जो मुझे खबर मिली थी वह यह थी की बैजरो के पास ही एक गांव है जिसका नाम है तंदोला। तंदोला में यह शमशान घाट है जो कि अब एक बियाबान है, उजाड़ हो चुका है और अक्सर यहां से रात में हांटिंग्स की खबरें आ रही हैं। आस-पास के गांव वालों में इस श्मशान घाट को लेकर एक अजीब सा डर है। ऐसा माहौल बना चुका था। यह शमशान घाट अब लोग रात में उस रास्ते से जाने से कतरा ने लगे थे। जरूरत चाहे कैसी भी हो, कोई मेडिकल जरुरत हो या कुछ भी लोग अब वह रास्ता चुनने से डर रहे थें। 


जब मुझे यह खबर मिली तो मैंने सोचा यार एक बार चल कर देखा जाए, पता किया जाए, वहां पर है क्या, शायद मेरे वहां जाने से कोई एक सच्चाई बाहर आ सके और शायद वह सच्चाई इन गांव वालों की मददगार हो सके। 


जब मैनें उस गांव वाले से यह पूछा कि भाई यह शमशान घाट है कहाँ तो उन्होंने मुझे बताया कि बैजरो से आपको ट्रैक शुरू करना पड़ेगा तंदोला की तरह यह करीब 8 से 8.5 किलोमीटर का एक ट्रेक होगा, जोकि एक काफी मुस्किल ट्रेक है लेकिन आप चार-पांच घंटे में वहां पहुंच जाएंगे। 


जब आप तंदोला जाएंगे तो तंदोला और बैजरो की बीच में यानी की बैजरो से करीब 4 किलोमीटर आगे टंडोला की तरफ रास्ते में श्मशान घाट मिलेगा। मैने उनसे और ज्यादा जानने की कोशिश की पर उन्होंने मुझे कुछ खास बताया नहीं। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा की आप तंदोला के गांव वालों से बात कीजिए क्योंकि उनकी मान्यता के हिसाब से यह जगह हांटेड और जो कहानियां वो लोग हमें बताते हैं हम उन पर यकीन करते हैं । 


मैंने सफ़र शुरू किया तंदोला के लिए ये ट्रेक वाकई मुश्किल ट्रेक था, एक सीधी खड़ी चढ़ाई थी लेकिन थैंक गॉड की रास्ता थोडा ठीक थक था। पगडंडीया थी जहाँ पर प्लेन मिटी थी अक्सर क्या होता है की जब आप पहाड़ों पर पत्थरों पर ट्रेक करते हैं तो वो ज्यादा मुस्किल होता है।  


मैं उसी रास्ते से होता हुआ जा रहा था। पहले मैंने यह सोचा था कि मैं दिन में एक बार श्मशान घाट रुक कर के वहाँ देखूंगा की वहां दिन में माहौल कैसा है।  या फिर मैं श्मशान घाट जाऊंगा और अपनी इन्वेस्टिगेशन करके वापस आ जाऊंगा। लेकिन मैंने यह सोचा कि क्यों न पहले मैं तंदोला जाऊं। वहां के लोकल गांव वालों से बात करूं। पता तो चले कि बात है क्या? 


मैं सीधे तंदोला पहुँच गया करीब 3- 4 घंटे का एक मुस्किल ट्रेक करने के बाद मैं वहां पहुँचा तो मैं बहुत थक गया था। मैं वहां दिन के 1 बजे के आसपास वहां पहुंचा था । मैं वहां गया और मैंने वहां बातचीत करनी शुरू की। मैने उन्हें बताया कि मैं कौन हूं और मैं क्या करता हूं और मैं किस मकसद से यहां पर आया। 


ढाई बज रहे थे दिन के। गांव में चौपाल लगी और उस चौपाल में मुझे एक अच्छा सा लंच कराया गया। इस दौरान वहां पर मेरी बहुत सारे लोगों से बातचीत हुई, तब लोगों ने मुझे बताया कि जो श्मशान घाट है असल में जानवरों का श्मशान घाट था,

जी हाँ जानवरों का श्मशान घाट !! मेरे लिए ये एक बहुत ही अलग स्टोरी बन चुकी थी अब। अब मेरे लिए यह बिल्कुल नए तरीके का इन्वेस्टीगेशन बन चूका था। 


लोगों ने भूत प्रेत चुड़ैल आत्मा, वगैरा-वगैरा, इनकी कहानियां मैंने सुनी है, लिखी है, लेकिन एक ऐसा श्मशान घाट जो जानवरों को श्मशान घाट हुआ करता था। यह मेरे लिए थोड़ा सा नया और स्ट्रेंज भी था। एक ऐसा श्मशान घाट जो कभी किसी ज़माने में जानवरों का श्मशान घाट हुआ करता था और आज वो हाँटेड है। कुछ जानवरों की आत्माओं से। 


मुझे ज्यादा बातचीत करने पर पता चला कि ज्यादातर वहां पर कुछ घोड़ों की आवाजें आती है। हालाँकि हमें कुछ लोगों ने ये भी बताया की वहां कुछ कुत्तों की आवाजे भी हैं ।  


जब मैं ज्यादा जानें की कोशिश की तो मुझे ये कहानी से ये समझ आया की अगर ये श्मशान घाट  यहाँ पर था तो इसे बंद क्यों कर दिया गया? सबसे पहले तो यह सवाल आता है और यह शमशान घाट चालू किसने किया था? 

गावं वाले ये तो नहीं बता पाए कि ये शमशान घाट शुरू किसने किया था? लेकिन हाँ उन्होंने मुझे ये जरुर बताया की इसे बंद क्यूँ किया गया।


गांव में एक आदमी हुआ करता था जिसके पास एक जोड़े घोड़े थे, एक नर और एक मादा।  


एक रात इन दोनों नर और मादा घोड़ों के ऊपर शायद कोई डिफेक्ट हुआ या कुछ और हुआ या फिर कुछ भी हुआ, इस बात का जवाब तो गांव वाली भी नहीं दे पाए कि हुआ क्या था।  


उसके बाद उसके बाद ये घोड़े अपना अस्तबल छोड़कर जंगल में चलेंगे। अगले दिन सुबह जब मालिक की नींद खुली तो उसने देखा की अस्तबल में घोड़े नहीं है, तो उसने एक बड़े लेवल पर तलाशी अभियान शुरू किया और गांव वालों ने मिलकर जंगल के आसपास इन दोनों घोड़ों को खोजने की कोशिश की। लेकिन वो दोनों घोड़े नहीं मिले। 


इस बात को करीब तीन-चार दिन गुजर गए। तभी अचानक उनमें से एक घोड़ा अपने आप वापस आता है। लोग उसका स्वागत करते हैं। दूसरा घोड़ा अभी भी नहीं मिला है। लेकिन मालिक को इस बात की राहत थी कि कम से कम एक घोड़ा जो है, वह मेरा वापस आ गया। जैसे ही वह, घोड़ा गांव में वापस कदम रखता है। उसके तुरंत बाद कुछ दिनों के अंदर ही गांव में जानवर मरने लगें। 


गांव वालों का ये मानना था कि यह घोडा शापित हो गया है। इसके अंदर एक शैतानी आत्मा गई है जिसकी वजह से ही बाकी जानवरों को भी मार रहा है। इस बात से गांव वालों ने मिलकर उस घोड़े को भी मारने का फैसला किया और यही हुआ। उसके बाद इन सारे जानवरों की लाशों को ले जाकर के उसी श्मशान घाट पर जला दिया गया। उनका अंतिम संस्कार कर दिया और उसके बाद इस श्मशान घाट को हमेशा हमेशा के लिए बंद कर दिया क्या? 


धीरे-धीरे जब लोग तंदोला से निकलकर बैजरो जाने लगे। जब लोग यह सफर पूरा करने लेगे, तो रात में अक्सर उन्हें रोने की आवाज सुनाई देने लगी। कई लोगों ने रात के करीब 2:00 बजे के आसपास घोड़े को सामने से देखने की बात कही कि मैंने देखा है की यह वही घोडा था जिसे गांव वालों ने मार डाला था।


यह कहानी अपने आप में थोड़ी अलग थी और मुझे बेचैन कर रही थी। यह सब जब मुझे पता चला तो मैं तो यह नहीं सोच पा रहा था की मैं वहां जाऊं या ना जाऊं। लेकिन फिर भी मैंने यह फैसला किया कि मैं आज रात वहां रुकुंगा और देखूंगा कि क्या होता है? इस पूरी कहानी के साथ मेरा लंच खत्म हुआ और करीब 3:15 या 3:30 बज रहे थे। जब मैंने गांव वालों से विदा ली और वापस अपना सफर शुरू किया उस श्मशान घाट के तरफ। 



मिट्टी वाला रास्ता थोड़ा फिसलन भरा था। इस कारण पहाड़ों से शाम के वक्त नीचे उतरते हुए पैर जमा जमा कर चलना था और ऐसी सिचुएशन में स्पीड स्लो हो गयी थी और इसी स्लो स्पीड के साथ मैं करीब सवा छह या 6:30 बजे उस श्मशान घाट पहुंचा। शाम ढल चुकी थी, अंधेरा लगभग हो ही चुका था। जरा जरा सी लालिमा अभी भी बाकि थी आसमान में लेकिन दिखने को कुछ दिख नहीं रहा था।


और जब मैं वहां पहुंचा तो मैंने देखा कि मेरे सामने एक टुटा हुआ स्ट्रक्चर है, एक छोटी सी बिल्डिंग जिसमें सिर्फ तिन दीवारें थी एक तरफ से वह खुला हुआ था, ऊपर सीमेंट की छत थी। पहले मुझे यह समझ में नहीं आया कि क्या वाकई यह वही श्मशान घाट है, लेकिन तब मैंने वहां पर टॉर्च से देखा तो वहां पर लिखा हुआ था शान यानि की शमशान घाट का शम और घाट हट चका था और सिर्फ का शान लिखा हुआ था।

यह पूरी ईमारत अब कुछ इश तरीके की हालत में थी जैसे मनो की अब बस गिरने वाली ही हो। इसकी ठीक निचे एक पहाड़ी नदी बह रही थी। इस श्मशान घाट से पहाड़ी नदी तक का जो रास्ता था, निचे उतरने वाला ये करीब 30 मीटर का रहा होगा। जब मैंने मेन रास्ता छोड़ कर श्मशान घाट की उस इमारत के पास पहुंचा और वहां से मैंने धीरे-धीरे अपना सफ़र शुरू किया उस नदी के लिए। 


रास्ते में घनी झाड़ियाँ घास ये सब थे। और मैं बार-बार उनके ऊपर पैर रख कर जा रहा था। कुछ आवाज भी ऐसी आ रही है जिसके बारे में थोडा अनिश्चित था, हाँ ये हौन्टिंग से रिलेटेड कोई आवाज नहीं थी, ऐसा होता है झाडियो में और झाडियां भी थोड़ी गीली थी। जब आप किसी सुनसान जगह पर चलते हो तो आपको अक्सर ये लगता है की आपके पीछे कोई है और आप बार बार मुड कर पीछे देखते हो। बस कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हो रहा था और मैं बार बार पीछे मुड कर देख रहा था लेकिन वहां कोई नहीं होता था।


 ये पार करते हुआ मैं नदी के पास पहुंचा। नदी की जो धारा थी एक नार्मल स्पीड में थी जैसे की एक पहाड़ी नदी होती है। 

पहाड़ी नदी में बहुत सारे बड़े-बड़े पत्थर थे और पानी जो था वो उन पत्थरों के ऊपर गिरता हुआ नीचे की ओर जा रहा था, यानि उस जगह पर इस नदी की आवाज जो थी वो बहुत तेज थी, अगर आप ऊपर के रस्ते से भी गुजर रहे हैं...तो उस  नदी की आवाज साफ-साफ आपके कानों पर जाएगी और जैसे-जैसे रात ढल रही थी, वैसे-वैसे वह आवाज बढ़ती जा रही थी। क्योंकि रात में पानी का जो बहाव होता है,  वह थोडा तेज हो जाता है। और आस पास सन्नाटा होने के कारण भी आवाज ज्यादा सुनाई देता है। 


मैंने देखा की आस पास क्या-क्या है क्योंकि जब भी आप इन्वेस्टीगेशन के लिए किसी जगह पर जाते हैं तो यह समझना जरूरी है कि उसके आस-पास क्या है, कैसी बिल्डिंग..कैसे लोग हैं..कैसे पेड़ पौधे हैं, कैसा पानी है, आवाज कहां से आती है वगैरा-वगैरा आपको उसे जानना बहुत जरूरी होता है। क्यूंकि रात में जब आप इन्वेस्टिगेट कर रहे होंगे तो आपको ही पता होना चाहिए कि आपके कानो तक पहुंचने वाली हर एक आवाज किस चीज़ की आ रही है? 


रात के करीब 9:30 बजे के आसपास श्मशान घाट के पास जो छोटा सा टुटा हुआ स्ट्रक्चर था उसके अंदर गया। मैंने आपना  बैग रखा और तभी अचानक से वहां पर हल्की हल्की बारिश, शुरु हो गयी, धीरे-धीरे बारिश बड़ती गयी और मैं वहां बैठा यह प्रे कर रहा था की ये बारिश कब रुकेगी। क्योंकि मुझे वहां पर दो चीजों का डर था एक जैसे- जैसे बारिश तेज होती जाएगी...मेरे भीगने के चांसेस बढ़ जाएंगे क्योंकि मेरे पास कुछ है नहीं, मैं खैर और कुछ नहीं कर सकता था। 


और एक बात का डर था कि कहीं मेरे ऊपर ये टुटा हुआ स्ट्रक्चर न गिर जाये। बार-बार मन में प्रे कर रहा था कि बारिश बंद हो जायेया या कम से कम धीरे-धीरे हो। करीब 10:30 बजे के आसपास बारिश बंद हो गई और आप यकीन नहीं करेंगे। बिल्कुल अचानक से बंद हो गया? 

आमूमन बारिश तो धीरे बंद होती है। धीरे धीरे पहले हलकी फिर और हलकी और धीरे धीरे उसकी बुँदे पतली होती जाती है, छोटी होती है फिर बहुत छोटी होती है और फिर गायब हो जाती लेकिन यहाँ ऐसा नही हुआ एक बार में ही अचानक बारिश। 


बारिश के कारन जमीन पूरी गीली हो चुकी थी। जगह-जगह पानी जमा चुका था। उस जमीन के ऊपर मैं धीरे-धीरे पैर  जमा जमा कर चल कर आसपास देखने की कोशिश कर रहा था। करीब आधा घंटे तक श्मशान का मुआयना किया.. लेकिन वहां मुझे कुछ नहीं मिला वहां एक अजीब सी शांति थी। मेरे सारे डिवाइस की रीडिंग बिलकुल नार्मल आ रही थी।  श्मशान के पीछे जो नदी बह रही थी उसकी आवाज और ज्यादा तेज हो चुकी थी। मैं क्लियरली सुन पा रहा था कि बारिश की वजह से जो पानी तेज हुआ है और पानी अपनी पूरी ताकत के साथ जब पत्थर से टकरा था उसकी आवाज बहुत तेज आ रही थी।   


वहीँ  श्मशान घाट के दूसरी तरफ एक जंगल था। जंगल से मुझे हाथियों के चिहादने की आवाज मेरे कानों तक पहुंच रही थी। मुझे लग रहा था हाथी मेरे तरफ ही यानि श्मशान के तरफ आ रहे है। मुझे समझ नही आ रहा थी की वे यहाँ आ गये तो मैं क्या करूँगा मैं बहुत बडे मुश्किल में था और मुझे नहीं पता था की मुझे क्या करना है। जमीन पूरी गीली हो चुकी थी। ऐसी सिचुएशन में भाग भी नहीं सकता था, आपकी छोटी गलती आपको हजारो फीट निचे गहरे खाई में ले जाती और किसी को पता भी नहीं चलेगा। 


यह सोच सोच, थोड़ा, समय और गुजरा और एकदम से सब कुछ शांत हो गया। आपकी विश्वाश नहीं करेंगे। एकदम से सब कुछ शांत हो गया, जो भी आवाजें आ रही थी सब आनी बंद हो गई। पक्षियों की आवाज आनी बंद हो गई। आसपास मेरी कोई आवाज नहीं हो रही थी। यह सब कुछ अचानक से हुआ। यह थोडा स्ट्रेंज था। जैसे ही यह आवाज बंद हुई। मैंने तुरंत अपने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के आसपास की रीडिंग्स उठाने की कोशिश की लेकिन कुछ नहीं मिला। टेंपरेचर लेवल भी लेने की कोशिश की लेकिन सब एक दम नार्मल, नाईट विज़न कैमरा के पास गया उनको इंस्टाल किया। जंगल की तरफ उससे देखन शुरू किया। लेकिन वहां भी कुछ नहीं था। 


यह शांति वैसी नही थी जो आपके मन को सुकून देती है। यह शांति वैसी थी जैसा सन्नाटा होता है न जो आपके मन का सारा सुकून ले लेता है। आपका दिमाग हजारों किलोमीटर प्रति घंटे के हिसाब से भागने लगता है और यह सोचने लगता है। कैसे इस जगह से इस सन्नाटे से दूर जाया जाए। यह शांति अब सन्नाटा बन चुकी थी। पूरी तरह से शायद कहीं ना कहीं मेरे दिमाग पर भी ये सन्नाटा हावी हो रही थी।  मेरे दिमाग में यही चल रहा था की पूरी रात  यहाँ रुकूं और सच जानने की कोशिश करना चाहिए या मुझे यहां से निकल जाना चाहिए। इस पूरे पसोपेश में पूरी कन्फ्यूजन के दौरान अचानक से मुझ आती हैं कुछ आवाजें। 

घोडा, जी हाँ घोडा। जिस सड़क से मैं निचे उतरा था इस श्मशान घाट के स्ट्रक्चर तक आने के लिए उससे और उस सड़क के बीच की डिस्टेंस करीब 4-50 फीट थी और मुझ तक आइ कुछ घोड़ों के चलने की आवाजे! और वह आवाज धीरे धीरे मेरे पास आ रही थी। इन आवाजों ने मुझे बिलकुल स्थिर कर दिया था और मैं एक ही जगह पत्थर जैसे खड़ा था। 


आपने कभी 3d गाना सुनना है। इसमें आवाज आपके कानों के साथ खेलती है। कभी लेफ्ट जाती है, कभी राइट जाती है। यहाँ एक्साक्ट यही हो रहा था बस फर्क इतना था यह सब कुछ इन घोड़े की आवाज के साथ हो रहा था। मुझे लगता था कि घोड़ा मेरे लिफ्ट में चल रहा है और कभी मुझे लगता है कि घोड़ा मेरे राइट में चल रहा है और तब आती है। हिन्हिना ने की आवाज यानि की घोड़े की बोलने की आवाज। एक जोर की आवाज आती है और पता नही क्यू  मैं इस आवाज के साथ एक्शन में आ जाता हूँ और एकदम से मेरा ध्यान टूटा और मुझे लगा कि आवाज मेरे ऊपर से आ रही है यानी कि उस रास्ते से आ रही है। मैं तुरंत उस तरफ दौड़ता हूं। 


यह सब कुछ सोचता हुआ। अब मैं तो दौड़ता जा रहा था और मेरे दिमाग में चल रही थी मन ही मन हे भगवान वहां  घोड़ा होना चाहिए। वहां असली घोड़ा होना चाहिए। यह सब कुछ सोचता सोचता में दौड़ता हुआ उस मेन रस्ते पर पहुंचता 10 मीटर दौड़ के आगे जाने की कोशिश की। लेकिन वहां पर कोई घोड़ा नहीं, घोड़ा तो छोड़िए वहां कोई जानवर भी नहीं और अब आवाज भी बंद हो चुकी थी। 


हां, शायद आप ये कह सकते हैं कि जब तक मैं वहां पहुंचा तब तक हूं घोड़ा वाहाँ से जा चुका होगा। लेकिन जरा सोचिए 40 फीट दौड़ने में कितना समय लग जाएगा आपको? और उतने ही देर में घोड़े जैसा बड़ा जानवर कहां चला जाएगा? 


मैंने घोड़े को वहाँ आस-पास चारों तरफ देखने की कोशिश की। चारों तरफ लेकिन मुझे कुछ नहीं दिखा मैं भाग  कर वापस श्मशान घाट की तरफ गया। अंदर गया। मैं अपना बैग निकालकर कुछ और टॉर्च निकालने जा रहा था। लेकिन तभी सब कुछ दोबारा शुरू हो गया। सारी आवाज वापस आना शुरू हो गयी. ऐसा लगा मानो जैसे किसी ने उस नदी उस हाथी उन हवाओं उस जंगल को पॉज कर दिया था। नदी वापस बहनी शुरू हो गई उसी रफ़्तार में। नदी की वही आवाज दोबारा आने लगी। हाथी दोबारा बोलने लगी। हवाएं दुबारा चलने लगे और इस चीज़ ने मुझे शॉक कर दिया मैं सोच चूका था कि आज चाहे जो कुछ भी हो, मैं पूरी रात यही रहने वाला हूं। जो होगा देखा जाएगा और मैं वहां ही रुक गया। पर अफशोश की उस समय के बाद उस जगह पर दोबारा कुछ नहीं हुआ। 


सुबह के 5:30 बजे के आसपास पहली रोशनी मुझ तक पहुंची।  मैंने उस श्मशान घाट को देखा, उस नदी को देखा और मन में खुद से बस एक ही बात कही। जीवन में कई बार कुछ ऐसी चीजें हो जाती है जिसका शायद आप कभी  एक्सप्लेनेशन नहीं दे सकते। जीसकी वजहें  आप कभी नहीं बता पाएंगे और इसी सोच के साथ मैं उस जगह से वापस बैजरो की ओर निकल गया।

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