Mritaatma Ka Drawana Sapna Hindi Kahani: डरावना सपना

क्या सपनों से कोई हत्याकांड खुल सकता है? जी हां! ऐसा हुआ है।

भले ही आपको आज के वैज्ञानिक युग में यह कोरी कल्पना लगे। लेकिन यह पूरी तरह सत्य है कि एक मृतात्मा ने बार-बार अपनी सहेली को सपने में आ-आकर अपनी मृत्यु का संदेशा दिया। फिर सहेली ने इसका पर्दाफाश भी करवाया।

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Drawna Sapna Mritaatma Ki Hindi Story

Mritaatma Ka Drawana Sapna Hindi Kahani
मृतात्मा का डरावना सपना हिंदी कहानी

5 जून, 1957

लंदन स्थित अपने मकान में विलियम्स की नींद किसी के रोने की आवाज से खुली तो वह एकदम अपने बिस्तर पर उठ बैठे।


देखा कि बैड से उनकी पत्नी सेरेना गायब थी। उन्होंने दिमाग पर जोर दिया तो अभी तक रोने का जो स्त्री स्वर आ रहा था, वह उसकी पत्नी सेरेना का था।


किसी अन्जानी आशंका से घबराकर विलियम्स एकदम उठ खड़ा हुआ और बाहर के हॉल की तरफ तेजी से बढ़ा।


वहां उसकी पत्नी सेरेना एक कोने में बैठी रो रही थी। बहुत दुलार के साथ पत्नी के बालों में हाथ फेरते हुए विलियम्स ने पूछा "क्या बात है सेरेना?" लेकिन जवाब में सेरेना लगातार रोये चली जा रही थी। “बताओ भी, क्या बात है?" फिर भी कोई जवाब नहीं और रोना जारी रहा।


सेरेना को शांत करने का प्रयास करता विलियम्स बेचैन हो रहा था। उसने पूछा-“क्या बात है? बताओ तो सही। मत रोओ, बिना जाने तुम्हारी मदद भी तो नहीं कर पाऊंगा। प्लीज सेरेना, बोलो तो सही।"


बहुत मुश्किल से स्वयं को सम्भालती हुई सेरेना ने अपने पति की ओर देखते हुए कहा-“मेरी बेस्ट फ्रेंड मिकी...'आगे बोलते उसका गला रुंध गया।


विलियम्स को पता था कि सेरेना और मिकी में गहरी मित्रता है। समय-समय पर वह एक-दूसरे से मिलती रहती हैं। वह किसी अज्ञात आशंका का अनुभव करने लगा। उसने उससे डरते हुए पूछा-“वह ठीक तो है?"


“वह अब शायद जीवित नहीं है...।"

 

"ओ शटअप! यह शायद क्या है?" जाने क्यों उसे हल्का क्रोध आ गया। 


“सपने में उसकी मृत देह देखी है मैंने....."


सपने की बात सुनकर विलियम्स को राहत सी मिली।


"डोंट बी सिली। भला सपने की बातों में भी कोई दम होता है? तुमने तो मुझे डरा दिया था सेरेना।"


कातिल निगाहों से सेरेना ने पति की तरफ देखा तो वह उसे तसल्ली देने लगा।


✥✥✥


अचानक जैसे किसी ने पुकारा।

नींद में भी सेरेना ने साफ-साफ सुना। जैसे किसी कुएं से आवाज गूंजकर आयी- “सेरेना..."

अपने नाम से पुकार सुनकर सेरेना तुरन्त उठकर बैठ गयी। आंखें खोलने पर उसने अपने सामने पिंक स्कर्ट-टॉप में मिकी को खड़ी पाया।


प्रसन्नता से सेरेना पुकार उठी-“मिकी!"


लेकिन जैसे उसे कुछ याद आ गया। वह आश्चर्यचकित हो गयी। सेरेना को ध्यान हुआ कि वह तो इस समय मिकी के घर में है, जबकि वह अपने घर में सोयी थी। उसने पूछा-“लेकिन मिकी, मैं तुम्हारे घर में कैसे आ गयी?"


"मेरे बुलाने पर।" 

“तुमने कब बुलाया?" 

"जिस समय तुम नींद में थीं।" 

“और मैं नींद में आ गयी?" उसका आवाज में आश्चर्य था। 

“कैसे नहीं आती...जब मैंने बुलाया था!" 

“लेकिन तुम्हारी आवाज को क्या हुआ 

"क्यों?" 

"ऐसे लग रहा है कि जैसे तुम कुएं में से बोल रही हो।" 

"इसलिए कि मैं अब तुम्हारे संसार में नहीं हूं।"


“तुम्हारे कहने का मतलब क्या है मिकी? मैं नहीं समझ पा रही हूं... । तुम तो मेरे सामने खड़ी हुई हो?"


अचानक मिकी की रुलाई फूट पड़ी। रोते हुए वह बोली-सेरेना! मैं तुमसे सच कह रही हूं। मेरा विश्वास करो, मैं अब मर चुकी हूं।” अपनी बात पूरी करके वह एक दीवार में समा गयी।


सेरेना का चेहरा अचानक फक्क पड़ गया। डर से उसकी आंखें चौड़ी हो गयीं। क्योंकि दीवार में मिकी का शव दिख रहा था।

उसकी चीख निकल पड़ी-“ओह नो... ।"


चीख सुनकर विलियम्स जाग गया। उसने देखा, पास सोयी सेरेना डर के मार कंपकपाती हुई चिल्ला रही है। उसने सेरेना को जोर से हिलाया।


सपने से जागी सेरेना ने स्वयं को अपने बैड पर पाया। पास ही बैठा पति विलियम्स उसे झंझोड़ रहा था। सेरेना पूरी तरह पसीने में नहाई हुई थी। उसकी सांसें किसी मशीन की तरह तेज चल रही थीं।


विलियम्स ने कोमल स्वर में कहा-"क्या बात है, कैसे चीख रही हो? लगता है कोई डरावना सपना था?"


"विलियम्स, मेरी बात को हल्के में मत लो। मैं जो कह रही हूं, सौ प्रतिशत सही कह रही हूं। मुझे यकीन है कि मिकी की हत्या कर दी गयी है।” पूरा सपना पति को सुनाकर उसने कहा। 


“यह तुम्हारा वहम है डार्लिंग! तुम इस प्रकार की बातें सोचती रहती हो। शायद इस प्रकार की पुस्तकें भी पढ़ने लगी हो आजकल। ईश्वर मिकी को लम्बा जीवन दे! अपने दिल को निश्चित करके सहज भाव से जैसे रहती आयी हो, वैसे जियो।” कहते विलियम्स ने उसके गाल थपथपाये।


सेरेना ने पति की बात पर अमल करने का प्रयास किया और बाजार जाकर व अन्य प्रकार से मन को हल्का करना चाहा।


लेकिन रात वाले सपने ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और वह दिन भर उदासी से घिरी रही। 

जब सेरेना का दिल नहीं माना तो वह 22 जून को हारवुड रोड पुलिस स्टेशन पहुंच गयी।


थाने के ड्यूटी आफिसर ग्रेगरी ने सेरेना को देखकर सहज भाव से थाने आने का कारण पूछा


"क्या बात है मैडम, कैसे आना हुआ?"


"इंस्पेक्टर! प्लीज, मैं एक बड़ी गहरी उलझन में फंसी हूं। यदि मेरी बात पर यकीन कर सकें तो मैं कुछ कहना चाहती हूं।” अपना परिचय देने के बाद सेरेना ने कहा।


"आप अपनी समस्या बताइए तो। तभी तो उसे समझने और आप की बात पर यकीन करने की बात होती है। जो भी परेशानी आप अनुभव कर रही हैं, निसंकोच बताइए।" पूरी सहानुभूति दर्शाते इंस्पेक्टर ग्रेगरी ने कहा ।


"देखिए, मेरे पति की भांति हो सकता है कि मेरी बात सुनकर आप भी मजाक समझें। लेकिन मेरा विश्वास है कि मेरी सहेली मिकी के साथ जरूर कोई अनहोनी हो गयी है।" सेरेना ने कहा।


“पूरी बात तो बताइए।” इन्स्पेक्टर ने पूछा।


इंस्पेक्टर की बात के उत्तर में सेरेना ने अपने आने वाले सपनों के विषय में बताया। ग्रेगरी ने पूरी बात पूछी।


“सर! मेरी सहेली की लाश मुझे दीवार में दिखती है...और दीवार के पास एक अंगीठी भी रखी हुई होती है।"


उसकी बात में रुचि लेता इन्स्पेक्टर पूछने लगा-“मैडम, क्या आपकी सहेली मिकी मैरिड है?"


“यस।" “उसने सुसाइड किया है अथवा मर्डर हुआ है?"


“देखिए, जो सपने में दिख रहा है, मैं केवल वही बता रही हूं। यह भी निश्चित नहीं है कि कैसे क्या हुआ होगा? लेकिन यह निश्चित है कि यह सब मुझे रोजाना दिख रहा है।"


अपनी परेशानी का कारण बताती हुई सेरेना विचारों में गुम हो गयी और फिर उसने बताना प्रारम्भ किया...


“मेरी और मिकी की दोस्ती को सात वर्ष हो चुके हैं। मैं और वह शादी से पहले साथ-साथ एक स्टोर में नौकरी करती थीं। हम दोनों में बड़ी अच्छी निभती थी। शादी के बाद मैं अपनी गृहस्थी में लग गयी। फिर कुछ दिन बाद मिकी ने भी शादी कर ली।"


"शादी के बाद कैसे संबंध रहे?"


"हमारी दोस्ती में शादी से जरा भी अन्तर नहीं आया था। यह अवश्य है कि गृहस्थ दायित्वों के कारण व्यस्तता ज्यादा होने से मिलने में कमी आ गयी थी। हम दोनों जैसे शादी से पहले निरन्तर मिलते थे, उसमें तो शादी के साथ ही अन्तर आ गया। दूरी होने के कारण मिलने में भी कमी आ गयी। इसके बाद हम दोनों में पत्र-व्यवहार से सम्बन्ध बने रहे। लेकिन अब जाने क्या बात है...कि कुछ समय से उसके पत्र नहीं आ रहे हैं।"


"मिकी का आखिरी पत्र कब आया था?" "लगभग दो महीने पहले।"


“मिसेज सेरेना, उनके पति के स्वभाव के बारे में कुछ बताने का कष्ट करेंगी कि वह कैसे हैं?"


"जितना मैं जानती अथवा बता सकती हूं, उसके अनुसार तो मिकी का पति पारेडेस एक जिंदादिल और सदा प्रसन्न रहने वाला आदमी है। वह अपनी पत्नी से बड़ा प्यार करता है। पता नहीं कि मेरा दिल क्यों यह निश्चित मान रहा है कि मिकी अब दुनिया में नहीं रही है। यदि यह सच है तो उसके पति पारेडेस का ईश्वर जाने क्या हाल हो रहा होगा?" मिकी के पति के लिए चिन्ता जताती सेरेना ने गम्भीर स्वर में कहा।


"क्या वास्तव में वह दीवार मिकी के घर में है, जिसके पास आप प्रतिदिन अंगीठी देख रही हैं?"


“जी बिलकुल।”


इंस्पेक्टर ने जाने क्या सोचकर मिकी के घर जाने का फैसला किया। उसने पूछा-“आप भी चल रही हैं?"


"बिल्कुल! मैं भी तो इस प्रतिदिन दिखते सपने की सच्चाई जानना चाहती हूं। आखिर यही सपना मुझे प्रतिदिन क्यों दिखाई दे रहा है? मैं चल रही हूं।" सेरेना ने कहा।


थाने की गाड़ी निकलवाकर कुछ सिपाही को लेकर ग्रेगरी सेरेना के साथ मिकी के घर पर पहुंच गया। पहले उसने बाहर ही आस-पास के लोगों से बातचीत की तो पता लगा कि वह तो महीनों से नहीं दिख रही है।


पड़ोसियों से इस बात का पता चलते ही मिसेज सेरेना को चिन्ता हो गयी तथा इन्स्पैक्टर के भी कान खड़े हो गये।


पुलिस इन्स्पैक्टर को कुछ गड़बड़ी का अंदेशा होने लगा। मन-ही-मन में वह सोचने लगा-'कुछ तो गड़बड़ है...।'


सेरेना के साथ वह घर में पहुंच गया।


दरवाजा खटखटाने पर एक युवक ने दरवाजा खोला तो इन्स्पेक्टर ने सेरेना की तरफ देखा-मानो पूछ रहा हो कि यह कौन है!

निगाहों से ही सेरेना ने उसके पारेडेस होने की सहमति जतायी।


"क्या आप अपनी पत्नी मिकी के बारे में बतायेंगे पारेडेस..कि वह कहां है?" इंस्पेक्टर ने पूछा।


"क्या बताऊं, सर? नहीं कह सकता कि वह कहां है? क्योंकि मुझसे झगड़ कर वह पता नहीं कहां चली गयी है! मेरी पत्नी मिकी हर समय घर को युद्ध का मैदान बनाये रखने वाली औरत है। एक दिन ऐसे ही किसी बात पर हम दोनों में झगड़ा हो गया था तो मैं गुस्से में ही ड्यूटी पर चला गया। लेकिन वापस आया तो वह मुझे घर पर नहीं मिली।" गम्भीर स्वर में पारेडेस ने बताया।


“आपने कोई रिपोर्ट लिखाई थी क्या?" 

पारेडेस कुछ हिचकिचाता-सा बोला- “न...नहीं तो।"


इस जवाब को सुनते ही ग्रेगरी क्रोधित हो उठा और उसने पारेडेस के गाल पर जोरदार झापड़ मारते हुए गरजकर कहा- "तुम्हारी पत्नी को गायब हुए कई महीने हो गये हैं और तुमने पुलिस को सूचना देना भी गंवारा नहीं किया? ठीक-ठीक बताओ, मिकी कहां है?"


"मार्च के पहले सप्ताह से उसका कोई अता-पता नहीं है। वह ऐसा कई बार कर चुकी है। फिर कुछ दिन बाद वापस भी आ जाती है। अब भी मैं उसकी प्रतीक्षा में हूं। सच जानिए, इससे ज्यादा में मिकी की कोई जानकारी नहीं दे सकता..." घबराये स्वर में पारेडेस ने कहा।


"तुम्हारा इलाज करना पड़ेगा ऐसा मुझे लग रहा है...।" उसे चेताते हुए ग्रेगरी ने साथ आये सिपाहियों से पूरे घर को खंगालने को कहा, तो आदेश के साथ वह चारों तरफ फैलकर पारेडेस के घर की तलाशी लेने में जुट गये।


लेकिन सारे प्रयासों के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ।


उसी समय सेरेना की नजर एक अंगीठी पर पड़ी। वह तुरन्त उत्तेजना से चिल्ला पड़ी-“इन्स्पेक्टर! यही है वह अंगीठी...।"


सेरेना के इशारा करते ही इन्स्पेक्टर ने गर्दन घुमकार देखा तो अंगीठी के पास ही एक दीवार थी। उसे सफलता नजर आने लगी।


ग्रेगरी ने तुरन्त सिपाहियों से दीवार तोड़ डालने को कहा।


इन्स्पेक्टर के कहने के साथ सिपाहियों ने घर में रखी कुल्हाड़ी और हथौड़े से वह दीवार तोड़ डाली। दीवार टूटते ही वहां मौजूद सभी लोग हक्के-बक्के रह गये दीवार के अंदर से एक सड़ी-गली लाश, जो किसी स्त्री की थी, निकल आयी। यह मिकी का शव था।


शव देखकर सेरेना की रुलाई फूट पड़ी।


ग्रेगरी ने कहर भरी नजरों से पारेडेस को घूरा। उसकी डर के मारे कंपकंपी छूट रही थी।


पारेडेस को उसी समय हिरासत में ले लिया गया तथा पुलिस वैन में थाने ले आया गया। वहां उससे पूछताछ शुरू हो गयी।


पहले तो उसने पुलिस को भरमाने की पूरी कोशिश की लेकिन जब इन्स्पेक्टर ने अपना पुलिसिया रुख अख्तियार किया तो वह टूट गया


"मैं एक दूसरी औरत को चाहने लगा था। उससे विवाह करने में मिकी बाधक थी। मैंने उससे तलाक लेने का प्रयास किया तो वह इस पर राजी नहीं हुई। तब हम दोनों में झगड़े होने लगे। एक दिन जब इसी बात पर विवाद बढ़ा तो गुस्सा इतना आ गया कि मैंने नीचे पड़ा हथौड़ा उठाकर उसके सिर में मार दिया। जिससे मिकी बेहोश होकर धरती पर गिर गयी। कुछ देर में उसके दिल की धड़कन भी बन्द हो गयी तो घबराहट में मुझे कुछ नहीं सूझा। बस उसे इस दीवार में चूनकर मैंने यह चर्चा फैला दी कि वह मुझसे झगड़ा करके कहीं चली गयी है... ।”


वहां खड़ी सेरेना को शायद सपने में भी यह आशा नहीं रही होगी कि मिकी का पाते पारडेस इतना जालिम भी हो सकता है। उस आदमी के लिए सेरेना के मन में गुस्से और नफरत का मानो सैलाब उमड़ आया था। वह आगे बढ़ी और एक थप्पड़ उसके गाल पर मारते हुए घृणा से थूक दिया।


इन्सेक्टर ग्रेगरी हैरत में था कि सेरेना के सपने पर यकीन कर उसने अज्ञात हत्या का राज फाश कर दिया है। चार्जशीट दाखिल कर पारेडेस को जेल भेज दिया गया, मुकदमा चला तथा अदालत ने सब साक्ष्यों पर गौर करते हुए पारेडेस को उम्रकैद की सजा सुना दी।


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