Hospital Ke Bhoot Pret: नर्स की प्रेतात्मा [ हॉस्पिटल के भूत-प्रेत ]

Hospital Ke Bhoot Pret: Nurse Ki Pretatma
हॉस्पिटल के भूत-प्रेत: नर्स की प्रेतात्मा

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Nurse Ki Pretatma Hospital Ke Bhoot Pret Hindi Story


ग्रेसी इस अस्पताल में कभी वेटरन थी, मगर अब उसकी प्रेतात्मा मरीजों की देखभाल करती है और जैसा कि भूतों के बारे में मशहूर है कि वे रात में ही सक्रिय होते हैं, ग्रेसी की प्रेतात्मा भी रात को ही अपनी 'ड्यूटी' निभाती है। 

प्रिंस हेनरी अस्पताल सिडनी शहर से दूर समुद्र तट के निकट लिटिल बे में स्थित है। इसकी स्थापना 1881 में की गई थी। पहले इसका नाम 'द कोस्ट हास्पिटल' था, मगर । ग्लाउसेस्टर के ड्यूक हेनरी के आगमन पर यह नाम दिया गया। 1990 के दशक ।। इसका पुनर्निर्माण और विशेष रूप से विस्तार हुआ और यह आज भी मौजूद है। साथ ही मौजूद हैं अनेक प्रेत-प्रसंग भी।


ग्रेसी की प्रेतात्मा की इस नाइट-ड्यूटी के विशेष रूप से गवाह अस्पताल के 'बी' ब्लॉक के मरीज हैं। इस वार्ड को आजकल 'डेलानी वार्ड' के नाम से जाना जाता है। यहां इलाज के लिए भर्ती मरीज बताते हैं कि आधी रात के पश्चात् पुरानी शैली की सफेद नर्सिंग कैप सिर पर लगाए एक रहस्यमयी नर्स वार्ड में आती है और उनकी सेवा करती है।


वह उनके खाली गिलासों में पानी भरती है, सर्द रातों में उन्हें ठीक से कंबल ओढ़ाती है, आवश्यकता होने पर उनके नीचे बेड-पैन रखती है और उपयोग होने के बाद उन्हें हटाती भी है। मजे की बात यह है कि मरीजों को यह आभास तक नहीं होता कि एक प्रेतात्मा वार्ड में है और वही उनकी देखभाल कर रही है। परन्तु वहां की नर्से इस हकीकत से वाकिफ हैं और उससे भयभीत भी रहती हैं। 


हालांकि ग्रेसी को दुष्ट आत्मा के रूप में कभी नहीं समझा गया, मगर वह उस जमाने का प्रतिनिधित्व करती है, जब नर्स का दबदबा रहता था। अतः उसके भय से नर्से फटाफट उसके आदेशों का पालन भी कर डालती हैं। कई अवसरों पर नर्सओं ने ग्रेसी की प्रेतात्मा की उपस्थिति महसूस की है। उन्होंने महसूस किया है कि वह उनके कामकाज पर नजर रखती है। 


जब भी वे कॉफी-ब्रेक लेती हैं, ग्रेसी उसे पसंद नहीं करती। एक बार तो दो नर्से दूध उबालने के लिए चूल्हे पर रख, वार्ड में झांकने चली गईं। लगभग एक-डेढ़ मिनट बाद वे लौटकर आईं तो चूल्हा बंद था। बर्तन का दूध सिंक में फेंका जा चुका था और बर्तन ताजा-ताजा धोकर रखा गया था। 


अब इतनी जल्दी तो ये सारा काम कोई प्रेतात्मा ही कर सकती थी। ग्रेसी की प्रेतात्मा के इन कामों से उसकी छवि एक सहृदय और सीधी-सादी समर्पित नर्स की बनती है। मगर वास्तविक जीवन में वह रूखे मिजाज और सनकी आदतों वाली नर्स थी। वह इतनी नकचढ़ी थी कि किसी से मार्ग में छू जाने या टकरा जाने पर तुरन्त नहाने चली जाती थी। 


इसी अस्पताल के 'बी' ब्लॉक में लिफ्ट की बेकार पड़ी एक शाफ्ट में रहस्यपूर्ण परिस्थितियों में गिरकर उसकी मौत हुई थी। दरअसल इस अस्पताल की स्थापना टायफाइड, कोढ़ तथा चेचक जैसे अन्य संक्रामक रोगों के मरीजों के इलाज के लिए की गई थी। हजारों मरीज यहां आए। कई ठीक हुए, तो काफी संख्या में मरे भी। 


ऐसे में ग्रेसी जैसी बिगडैल नर्स मृत्यु के बाद प्रेतात्मा बनकर जीवन-काल में किए अपने व्यवहार के लिए प्रायश्चित कर रही हो, तो क्या आश्चर्य है! ग्रेसी की प्रेतात्मा के आने का भी एक निश्चित समय है। वह रात को ठीक दो बजे ही आती है और उस वक्त घड़ी की सुईयां रुक जाती हैं। ग्रेसी की प्रेतात्मा के बाद यदि किसी अन्य आत्मा की चर्चा होती है तो वह है एक आदिवासी लड़के की आत्मा। 


यह आत्मा भी इस अस्पताल के बी' ब्लॉक में घूमती है। मगर वह ब्लॉक की सीढ़ियों पर ही आकर बैठती है और यहां आने-जाने वाली नसों व दूसरे लोगों के साथ बाल-सुलभ छेड़छाड़ करती है।


कभी वह सीढ़ियों पर बैठा खिलखिलाता दिखता है। इन दो प्रेतात्माओं के अतिरिक्त और भी कई आत्माओं के किस्से इस अस्पताल से जुड़े हैं। आए दिन कुछ-न-कुछ ऐसा सुनने-देखने में आता रहता है, जिससे इस धारणा की पुष्टि होती है कि यहां एक-दो नहीं कई आत्माएं विचरती हैं। 


कभी किसी ने किसी उपकरण का स्विच ही ऑफ कर दिया। एक आत्मा किसी भारी-भरकम व्यक्ति की है। गलियारों की दीवारों पर उसके पदचिह उसके भारी पांवों की कहानी कहते हैं। इस आत्मा की पहचान नहीं हो सकी है। अस्पताल में बंद पड़े खाली वार्डों से नर्स को बुलाने के लिए बजर सुनाई पड़ते हैं। 


इतना कुछ होने के बावजूद अस्पताल में काम करने वालों और इलाज करवा रहे मरीजों को कोई दिक्कत नहीं होती। उनके लिए ये एक सामान्य और रोजमर्रा की बातें हो गई हैं। मगर प्रश्न उठता है कि एक ही जगह पर इतनी आत्माओं का जमावड़ा क्यों? इसका उत्तर भी शायद अस्पताल के पिछवाड़े बने उस पुराने और खासे बड़े कब्रिस्तान में है, जहां कभी एक हजार से ज्यादा लोगों को दफनाया गया था।


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Team Hindi Horror Stories

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