Bhutiya Road Hindi Kahani: भूतिया रोड हिंदी कहानी | कटे हाथ

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Kate Hath Hindi Bhutiya Road Story 2021

Bhutiya Road Hindi Kahani: Kate Hath
भूतिया रोड हिंदी कहानी: कटे हाथ

राजमार्ग पर खच्चर तथा घोड़ा गाड़ियां बेरोकटोक दौड़ती जा रही थीं। कि घोड़े और खच्चर अचानक अगले पैर हवा में उठाकर खड़े हो गये तथा बड़े भयानक ढंग से हिनहिनाने लगे। और फिर वह ऐसे बिदके कि उन्होंने अपने सवारों को ही पलट दिया, जिस से पीड़ा में डूबी चीख-चिल्लाहटें गूंजने लगीं। इसके बाद घोड़े और खच्चर सीधे दौड़ते चले गये।


जिसने भी यह खतरनाक हादसा देखा था, वही खौफजदा हो उठा। उसने दिल थाम लिया।


इन जानवरों को आखिर हुआ क्या है? ऐसा क्या दिखाई दे गया था उन्हें कि वह इस प्रकार बिदक गये तथा अपने सवारों को तो पटक ही दिया था, स्वयं भी जान की बाजी लगाकर दौड़े चले गये।


उसके बाद इसी रास्ते पर फिर एक रहस्यमय हादसा हो गया।


दो दोस्त साथ-साथ इसी ओर से साइकिल पर चले जा रहे थे और परस्पर बातों में भी मस्त थे।


अरे, यह क्या अपने हाथों पर उन्हें कुछ विचित्र अहसास सा हुआ। कुछ ऐसा जैसे बिजली का तार छू लिया हो। घबराकर साइकिल का हैंडिल उन्होंने छोड़ दिया। जबकि ऐसा करने से उन्हें गिर जाना चाहिए था। लेकिन गिरना तो दूर, साइकिलों का संतुलन पहले जैसा बना रहा।


लेकिन आश्चर्य का तो तब ठिकाना नहीं रहा, जब उन्होंने साइकिलों सहित अपने को हवा में उठा पाया। हड़बड़ाकर दोनों ने एक-दूसरे को पुकारा।


हवा में काफी ऊंची उठीं साइकिलें कुछ पलों बाद धरती पर जा पड़ी तथा रिमोट से कंट्रोल रोबोट की तरह घूमने लगीं। धरती पर गिर चुके साइकिल सवार दोनों दोस्त काफी घायल हो गये थे।


इतनी चोट लगने से हुए दर्द की अपेक्षा वह साइकिल सहित ऊपर उठने से बहुत हैरान थे


डार्टमूर तथा पोस्टब्रिज के बीच यह मैं रोड है। जिसे आज तक प्रेत-बाधित के रूप में जाना जाता है।


इस राजमार्ग (नेशनल हाईवे) पर इस प्रकार की प्रेतलीला करीब 1920 ई. के आस-पास शुरू हुईं तो इन्होंने लोगों में सनसनी तथा भय फैला डाला और इधर से बेसमय तो किसी ने भी आना-जाना ही बंद कर दिया।


अन्यथा यहां से घोड़े-खच्चर वाले, पैदल, साइकिल तथा अन्य छोटे-बड़े वाहन वाले आते-जाते ही रहते थे।


1920 में फिर एक हादसा घटित हुआ।


मोटरसाइकिल पर सवार एक डाक्टर इसी मार्ग से जा रहे थे। मोटरसाइकिल की साइड कार में उसके दो बच्चे भी बैठे थे।


तभी डाक्टर साहब बौखला उठे। क्योंकि नयी मोटरसाइकिल का इंजन निकलकर सड़क पर जा पड़ा था। इंजन मोटर- साइकिल के सामने गिरा था।


इंजन के ऊपर से होती हुई मोटरसाइकिल आगे चलती चली गयी और गिर पड़ी। दोनों बच्चों के साथ डाक्टर साहब सड़क पर जा पड़े। उन्हें चोट तो आयी, लेकिन शुक्र था कि जान बच गयीं।

उस साल इस प्रकार की कई घटनाएं हुईं तो 1921 ई. में प्रशासन की नींद खुली तथा यह रास्ता परिवर्तित कर दिया गया। लेकिन इसके बावजूद भी ऐसी घटनाओं में कमी नहीं आयी थी।


तेज गति वाले वाहनों के साथ यह घटनाएं नहीं हो रही थीं।


लेकिन सन् 1945 आते-आते यह भी होने लगा कि राजमार्ग पर जैसे ही कोई कार या अन्य चौपहिया गाड़ी-आती जाती हुई तो अज्ञात प्रेत सक्रिय हो उठता था। यकायक दो हाथ गाड़ी में घुसते और इस प्रकार स्टीयरिंग घुमा देते थे जैसे कोई अनाड़ी चला रहा हो। वाहन चालक चाहकर भी फिर वाहन को अपनी मर्जी से आगे-पीछे नहीं कर पाता था।


एक बार तो एक कैप्टन के साथ भी ऐसा हादसा हुआ था। जब वह कैप्टन इस राजमार्ग पर अपनी कार से निकल रहा था तो पोस्टब्रिज के बाद उसने दो छोटे पुलों से आगे तक का मार्ग तय कर लिया था कि उसे कुछ अजीब सा आभास हुआ।


उसके दोनों हाथों पर जैसे अचानक किसी के हाथ आ टिके और स्टीयरिंग इधर-उधर करना चाहा। कैप्टन ने इसे कोई वहम समझा। लेकिन उसका यह भ्रम नहीं था। वास्तविकता ही थी। इसलिए चाहकर भी वह हाथों को अपनी मर्जी से न चला सका। उसके हाथों में वास्तव में ही किसी के हाथ जकड़ चुके थे।


हैरान होकर उसने हाथों पर निगाह डाली तो कटे हुए हाथों ने उसके हाथों को जकड़ा हुआ था। डर से उसे अपने दिल की धड़कनें अटकती सी लगीं। बहुत भयानक दृश्य था। लेकिन उस पर खौफ इतना हावी हो चुका था कि चीखना चाहा तो हलक से आवाज भी न निकल सकी उसी समय कुछ गाड़ियों की हैडलाइट कैप्टन की कार के शीशे पर पड़नी शुरू हो गयी।


सामने आते वाहन से टकराने से बचने के लिए कैप्टन ने कार का स्टीयरिंग साइड की ओर घुमाया। लेकिन उससे ज्यादा शक्ति के साथ कटे हाथों ने गाड़ी वापस घुमा दी, इससे कार सड़क से उतरती चली गयी और एक बड़ी भयानक दुर्घटना होते-होते रह गयी। कैप्टन ने अदृश्य हाथों से संघर्ष करते हुए अपनी कार को जोरों से ब्रेक लगा दिये थे।


एक स्थानीय समाचार-पत्र ने यह पूरा वृतांत प्रमुखता से प्रकाशित भी किया था, क्योंकि कैप्टन ने अपने साथ घटी इस खतरनाक घटना के बारे में समाचार-पत्र को बयान दिया था।


एक नवयुगल एक दिन उस इलाके से निकला जा रहा था। रात पूरी तरह हो चुकी थी। चांद अपने पूरे यौवन पर अपनी रोशनी बरसा रहा था। मौसम भी बिलकुल साफ था।


उनकी कार जब राजमार्ग पर आयी। कि तभी अचानक जोरदार कोहरा बरसने लगा। इस प्रकार अचानक कोहरा आने से नवदम्पति हैरत में पड़ गए। लेकिन फिर ख्याल आया कि कहीं बर्फबारी हो गयी होगी । सर्दियां तो वैसे भी थी ही। चन्द देर में ही माहौल पर कोहरा ऐसे छा गया था कि हाथ भर की दूरी पर भी दिखना बन्द हो गया था। इस विपरीत वातावरण में उन दोनों ने कार आगे ले जाने का ख्याल ही त्याग दिया।


कार में ही अटैच्ड बैडरूम भी था। इसलिए वे पास में मौजूद सामान खा-पीकर, कार के शीशे बन्द करके बेड ! पर जा पड़े।


अचानक जाने किस समय पत्नी जाग पड़ी। वह अकारण ही नहीं जागी थी। बल्कि कोई कार के बाहर आवाज सुनाई पड़ी थी। लगा कि कोई कार के शीशे थप-थपा रहा था। थप-थप का कारण जानने के लिए वह उठ खड़ी हुई।


“हो सकता है कि कोई कुत्ता भटकता हुआ यहां आ गया है... तथा सर्दी से बचने के लिए भीतर घुसना चाहता है। इसलिए वह पंजे मार रहा है...।" कार के शीशों पर हो रही आवाज सुन वह सोचने लगी।


जिस खिड़की को खटखटाया जा रहा था, वह खिड़की पति के सिर की तरफ थी। पत्नी ने उस तरफ देखा था।


नवविवाहिता ने खिड़की की ओर देखा, जहां रोड लाइट का कुछ प्रकाश आ रहा था। देखते ही उसकी घिग्घी सी बंध गयी। वह जैसे पत्थर की होकर रह गयी थी। खौफ की ज्यादती उसके दिल की धड़कनों की दुश्मन बनी जा रही थी।


शीशे के बाहर बड़ा भयानक दृश्य था। क्योंकि दो कटे हुए हाथ शीशे पर घूम रहे थे। खौफ जब हद पार गया तो वह चिल्ला पड़ी। इससे घबराकर पति की भी नींद खुल गयी थी।


उसने एकदम उसके डरने का कारण पूछा


लेकिन डर से कांप रही पत्नी जैसे बहरी हो चुकी थी। डर के मारे फटी पड़ रहीं उसकी आंखें तो शीशों पर जम गयी थीं।


जाग गए पति ने अपनी पत्नी की टिकी नजरों का पीछा किया। उसकी भी हालत बिगड़ गयी और हिम्मत जवाब दे गयी। तभी पत्नी को जैसे आभास हो गया कि उसका पति भी जाग गया है। इस से उसका साहस बढ़ा।


मन-ही-मन में वह प्रेयर करने लगी। प्रभु स्मरण के कुछ देर बाद वह हाथ गायब हो गए। 


जब यह घटना चर्चा में आयी तो किसी ने इसे बकवास कहकर पल्ला झाड़ लिया और कुछ ने सच भी माना। लेकिन सालों बाद उसी रास्ते पर एक हादसा ऐसा भी घटित हुआ कि उन कटे हाथों की सत्यता पर सबको विश्वास करना ही पड़ा।


एक दिन चाडफोर्ड की तरफ प्लाईमाउथ इलाके से कोई मोटर सवार निकला जा रहा था। न तेज न धीमी, बस मध्यम गति से चला जा रहा था वह।


बड़े मजे में वह गाड़ी ड्राइव कर रहा था। कि तभी-कार की खुली खिड़की के रास्ते हवा का एक बड़ा तीव्र झोंका आया, मोटर कार चालक को एकबारगी तो अपनी आंखें बंद कर लेनी पड़ी। क्योंकि हवा का झोंका था ही इतना जोरदार।


कुछ पलों के पश्चात हवा का असर छंटने पर मोटर चालक ने अच्छी तरह से अपनी आंखें खोली। वह हड़बड़ा उठा। क्योंकि अपने हाथों पर उसे किसी की हथेली जैसा आभास हुआ।


उसे लगा कि उसका शरीर वहीं पत्थर का होकर रह गया है। अपनी हड्डियों में उसे बर्फ सी बहती लग रही थी। होंठ कंपकपा रहे थे। मुंह अचानक खुल गया था और आंखें भी चौड़ी हो रही थीं।


उसके हाथों पर महसूस होता स्पर्श अब दबाव होता जा रहा था। गाड़ियां चलाते बारह साल में ऐसा उसे पहले कभी नहीं हुआ था।


अपने हाथों पर उसने निगाह डाली तो वहां कटे हुए दो हाथ उसके हाथों को अपने नीचे दबोचे थे। अब तो डर के कारण उसका चेहरा फक्क पड़ गया था। वह ऐसे कंपकपा उठा कि जैसे जाड़े से बुखार चढ़ा हो। उसी समय हवा में कार उठनी शुरू हो गयी तथा फिर पलटती हुई पूरी शक्ति से सड़क पर आ पड़ी थी।


सेकंड के भीतर कार पटकाते हुए तहस नहस हो गयी थी और चालक की जान भी शरीर से आजाद हो गयी।


इस दुर्घटना का समाचार क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन पर पहुंचा तो वहां तुरन्त एक जांच दल जा पहुंचा।


मलबा बन चुकी कार को देखा तो जांच दल ने अंदाजा किया कि कार को अवश्य ही भयानक एक्सीडेंट का सामना करना पड़ा है। लेकिन उनका अनुमान उस समय निष्प्रभावी हो गया, जब वहां आस-पास किसी अन्य वाहन का कोई सबूत नहीं मिला जिससे मोटर कार भिड़ी होगी।


आश्चर्य का एक और भी कारण था कि मलबा बन चुकी कार का इंजन पूरी तरह ठीक-ठाक था। शेष कल-पुर्जे भी महफूज थे। किसी भी तरह अन्य वाहन से मोटर कार के टकराने का संकेत नहीं था।


अन्त्य परीक्षण करने वाले चिकित्सकों की रिपोर्ट भी बता रही थी कि मोटरकार चालक किसी नशे में भी न था।


स्टीयरिंग पर मृतक के हाथ बहुत मजबूती से कसे थे। जबकि उसकी अंगुलियां कुचल गयी थीं, फिर भी स्टीयरिंग नहीं छोड़ा था उसने।


मरने के बाद चालक की गर्दन नीचे झुकी हुई थी, जबकि सामने की तरफ होनी चाहिए थी। आंखें इस प्रकार फटी-फटी हुई थीं जैसे कोई भयानक दृश्य देखने के बाद किसी के साथ होता है। चालक के हाथों पर दबाव के गहरे चिन्ह मिले थे।


आखिर पोस्टब्रिज से डार्टमूर तक क्षेत्रीय प्रशासनिक अधिकारियों ने थोड़े-थोड़े फासले पर बोर्ड लगवा दिये थे। इन सभी बोर्ड पर स्पष्ट चेतावनी दर्ज थी कि किसी भी प्रकार इस मार्ग पर न रुकें। कोई चीज अपेक्षित हो, गाड़ी में तेल कम हो अथवा किसी प्रकार की खराबी हो तो पहले ही जांच-परख लें।


इस चेतावनी के साथ ही प्रशासन ने बोर्ड पर इस पूरे रास्ते नक्शा भी बनवा दिया था। यह प्रेतकांड जब से प्रारम्भ हुआ था, उस समय से शहर प्रशासन की ओर से यह प्रबंध किया गया था, ताकि किसी भी वजह से सैलानियों का कोई दल उस इलाके में रुक न सके।


इसके बावजूद कोई-न-कोई सैलानी या फिर इसी इलाके का भी आदमी संकट में पड़ता रहता था।


लेकिन एक रात, एक युवती पल्म इस क्षेत्र में भटक गयी। यहां के रास्तों का उसे पता नहीं था। वह अपने साथ इसलिए एक नक्शा भी लिए थी। लेकिन जहां वह रास्ता भूली थी, वहां पर न तो कोई गार्ड था और न कोई मार्गदर्शक बोर्ड या उस पर बना नक्शा।

अपनी कार को उसने राजमार्ग के एक ओर लगा दिया था। स्टीयरिंग पर अपने समक्ष उस इलाके का नक्शा भी खोलकर फैला लिया।


निकट से गुजरतीं तीव्रगामी गाड़ियों की हैडलाइट्स तथा कार के भीतर की रोशनी में वह बड़े गौर से नक्शे को समझ रही थी।


मई का महीना था। घमस भरी गर्मियों का मौसम था। ऐसे में सब लोग जब गर्मी के मारे परेशान हुए रहते हैं।


लेकिन यह क्या? कार के भीतर उसे अचानक सर्दी का आभास हुआ ! उसे हैरानी हुई। फिर अपने चेहरे पर उसे ठीक उसी समय किसी की नजरें टिकी होने का आभास भी हुआ। फौरन उसने सामने निगाहें उठायीं।


सामने जो कुछ भी उसने देखा, उसके बाद अपने होश-हवास बनाये रखना किसी युवती के लिए सहज सम्भव नहीं था।


विंडस्क्रीन पर पल्म ने देखा कि वहां दो कटे हुए हाथ जमे थे। जो शीशे पर अंगुलियों से तबले की तरह ताल देने का यत्न कर रहे थे। फिर हाथ अंगुलियों के बल पर खड़े होकर चलने लगे।


यह देखकर उसे अपना खून सूखता सा लगा। ऐसा महसूस किया पल्म ने कि वह अभी बेहोश हो जायेगी। पिंजरे में कैद पक्षी सा उसका दिल फड़फड़ा उठा था। भय के कारण जैसे उसका गला फंस कर रह गया। वह चाहकर भी चीख न पायी।


कि सारे जहां के स्वामी का अचानक पल्म को ध्यान आ गया। बस वह सच्चे मन से उसे पुकारने लगी। ईश्वर का स्मरण उसने प्रारम्भ किया तो शीशे से दोनों कटे हाथ और उसका भय एक साथ 'छू' हो गये।


इसके बाद पल्म ने कार जल्दी से स्टार्ट की तथा वापस दौड़ती हुई टोरबे में आकर रुकी।


टोरबे में पल्म अपने एक मित्र के घर पर रह रही थी। जबकि वारदात वाले स्थान से टोरबे तक का फासला लगभग तीस किलोमीटर था। किन्तु यह तीस किलोमीटर का फासला उसने किस प्रकार तय किया, वह खुद भी नहीं जान सकी थी।


यह वारदात पल्म ने अपने दोस्तों को भी बतायी। जबकि वह जानती थी कि यह सब सुनकर उसके मित्र उसे रूढ़िवादी तथा डरपोक मानकर हंसी उड़ायेंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। बल्कि वे सब गम्भीर दिखने लगे। इस घटना पर उन सबको सरलता से विश्वास हो गया था। कारण यह था विश्वास करने का कि वह लोग पहले भी ऐसी वारदातों के बारे में सुन चुके थे।


उन सबने उसे बताया कि इस राजमार्ग पर इसी प्रकार अनेक लोग अपने प्राणों से हाथ धो बैठे हैं। जैसे पल्म ने भुगता, वह तो बहुतों के साथ हो चुका था।


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