Pisa Ki Minar Ki Bhutaha kahani: प्रेतात्मा

Pisa Ki Minar Ki Bhutaha kahani: Pretatma
पीसा की मीनार की भुतहा कहानी: प्रेतात्मा 

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एक दिन मैं पीसा की झुकती मीनार के आसपास घूम रही थी। मैंने अपने सामने एक युवती को देखा। मैंने सोचा-हो सकता है वह भी मेरी ही तरह कोई पर्यटक है। अतः मैंने उसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। मैं टहलते हुए मीनार की सबसे ऊपरी मंजिल पर पहुंच गई। मैंने मुड़कर देखा...वही युवती पीछे थी। 

वह जोर-जोर से रो रही थी मैं उसके निकट जाकर कुछ पूछती, इससे पहले ही उसने इटेलियन भाषा में कुछ यूं कहा-'मुझे क्षमा कर दीजिए। अलविदा!' और वह यह कहते हुए वह मुझे घूर रही थी। फिर मैंने देखा-वह मीनार के कोने तक गई और छलांग लगा दी...धड़ाम! और...और...वह हवा में ही अदृश्य हो गई!' 

यह कहानी इटली की एक पर्यटक फ्रांसिसिका पेटिलि का है। उसने 20 सितंबर, 2002 को संसार के आश्चर्य पर यह भूतहा घटना देखी । पीसा की झुकती मीनार हर लिहाज से एक रहस्यमय आश्चर्य है। जनवरी, 2002 से पीसा की झुकती मीनार चढ़ने के लिए फिर से खोल दी गई है। 

सन् 2000 में ही घोषणा कर दी गई थी कि पीसा की झुकती मीनार और नहीं झुकेगी। इटली के एक प्राचीन शहर पीसा स्थित मीनार को और झुकने से रोकने के प्रयास अन्ततः सात सदियों के पश्चात् सफल हो गयी हैं। 

65 वर्षीय ब्रिटिश प्रोफेसर जॉन बरलैंड का दावा है कि मीनार अगले साढ़े तीन सौ साल तक नहीं झुकेगी और पर्यटक 200 साल तक ऊपर चढ़ सकेंगे। 6 जनवरी, 1990 से पर्यटकों को मीनार से थोड़ी दूरी पर ही रोक दिया जाता था। मीनार के चारों तरफ लोहे के चैन लगा दिए गए थे और पर्यटक दूर से ही मीनार को हाथ लगाते अंदाज में तस्वीर खिंचवाने का आनन्द लेते थे। शायद संसारभर में फैले करोड़ों चाहने वालों के अटूट प्यार के कारण ही मीनार का झुकना रुक गया है। 

दरअसल विश्व प्रसिद्ध झुकती मीनार का झुकना सन् 1997 से रुक-सा गया है। ब्रिटिश विशेषज्ञ जॉन बरलैंड की राय पर मीनार की नींव में एक ओर 900 टन सीसा रखने से इसका झुकना रुक गया। वैसे तो इटली सरकार की दिलचस्पी मीनार को सीधा करने में जरा भी नहीं रही। क्योंकि यदि मीनार झुकती ही नहीं तो क्या आकर्षण होता? लेकिन इसका झुकाव रोकना आवश्यक हो गया था। 

कारण? यदि झुकने की यही गति रहती तो सन् 2050 तक यह ढह जाती।


पीसा की झुकती मीनार सदियों से इटली की पहचान ही नहीं, बल्कि संसार के सात आश्चर्यों में से एक है और दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए रहस्यमय अजूबा भी। सन् 1990 में पहली बार लंदन में इम्पीरियल कॉलेज के प्रोफेसर जॉन बरलैंड ने मीनार के निरन्तर झुकने का कारण बताया कि मीनार जिस आधार पर बनी है उसमें घुमाव की वजह से मीनार टेढ़ी होती जा रही है। तब तक मीनार 5.44 डिग्री कोण तक झुक चुकी थी। तब आशंका थी कि यदि झुकाव 5.50 डिग्री तक हो गया तो मीनार गिर जाएगी। मीनार के झुकाव के कई वर्षों के अध्ययन से ज्ञात हुआ कि मीनार का झुकना तापमान पर निर्भर करता रहा। मिसाल के तौर पर तापमान गिरता है तो मीनार झुकती है फिर दिन में मीनार का झुकाव रात की अपेक्षा अधिक होता है। इतिहास गवाह है कि सफेद संगमरमर के शानदार 179 फुट लंबे प्लीनिंग टावर का निर्माण कार्य अगस्त 1173 में इटली के वास्तुकार बोनान्तो पिसोना की देख-रेख से शुरू हुआ। निर्माण कार्य शुरू होने के कुछ समय पश्चात् ही पीसा और फ्लोरेंस के बीच युद्ध छिड़ गया। अतः निर्माण कार्य अधर में ही लटक गया।


काफी लम्बे समय के पश्चात् मीनार की तीन मंजिलें बन पाईं लेकिन तभी मीनार झुकने लगी। बताया गया कि कमजोर नींव के कारण से झुकाव शुरू हुआ। अतः निर्माण कार्य रोक दिया गया। फिर एक सदी के पश्चात्, गिओवानी डी सिमवन की देखरेख में निर्माणकार्य फिर से शुरू हुआ। उसके झुकाव को रोकने के भरसक प्रयास किए और जैसे-तैसे मीनार को छठी मंजिल तक पहुंचा दिया और झुकाव का रहस्य बना ही रहा।


पीसा की मीनार गोलाकार है और दीर्घाओं में खंभे हैं। भीतर 194 वृत्ताकार सीढ़ियां हैं जो सबसे ऊपरी मंजिल तक पहुंचाती हैं। सबसे ऊपरी मंजिल पर घंटीयुक्त टावर है। इसे 14वीं सदी में एनडिया पिसानो के पुत्र टॉमासो ने बनवाया था। इसका व्यास निचली मंजिलों से कम है। वहां लगी सात घंटियां संगीत के सात सुरों की प्रतीक हैं। पहला घंटा सन् 1350 में लगाया गया था। 

फिर सन् 1838 में हड़कंप मच गया। स्थानीय आर्किटेक्चर एलेसेंड्रो डीला घीरारडीसा ने मीनार के आसपास पैदल रास्ता बनाना आरम्भ किया। परिणाम स्वरूप कुछ हफ्तों में ही मीनार एक फुट झुक गई। इस रहस्य से परदा उठाने के लिए लाखों रुपए के इनामों की घोषणा की गई।


मीनार प्रतिवर्ष ।.37 मिलीमीटर तक झुकती रही। इस सीमा तक कि सन् 1992 में मीनार का अंदरूनी हिस्सा गिर गया। एहतियात के तौर पर झुकाव की विपरीत दिशा में 600 टन सीसे की सिल्लियां मीनार की बुनियाद पर टिकाई गई। लेकिन इसके पश्चात् भी मीनार का झुकना जारी रहा और रहस्य बढ़ता रहा।


सन् 1993 के अंत में मीनार की नींव को इलेक्ट्रोसमोसिस तकनीक के द्वारा मजबूत किया गया मगर दुर्भाग्यवश नाकामी ही हाथ लगी और झुकने का रहस्य और गहरा हो गया।


इसके बाद जून, 1994 से जून, 1995 के बीच 10 एंकरों का निर्माण किया गया। ताकि मीनार का संतुलन और न बिगड़ सके। साथ ही आसपास की जमीन को तरल नाइट्रोजन के सहारे जमा दिया गया।

सितम्बर, 1995 के दूसरे पखवाड़े में मीनार फिर झुकी। परन्तु इस बार विपरीत दिशा में, फिर सन् 1996 और 1997 में इसी तकनीक पर काम जारी रहा। सन् 1998 में मीनार को लोहे की जंजीरों से बांधकर मीनार को सहारा दिया गया। सन् 1999 में झुकाव निरन्तर घटता गया और एक बार फिर झुकती मीनार शान के साथ सैलानियों के लिए खोल दी गई और अब ऊपरी मंजिल तक सैलानियों के खुलने से भूतहा हो चली है। मीनार में भूतों के आने-जाने के मामले पर कई खोजबीनें की गई। 

सन् 2003 में ही रहस्य खुला कि पीसा के नीचे दलदल में भूतों की फौज दफन है। ज्ञात हुआ है कि वेनिस की तरह ही पीसा भी सागर पर बना है। पुरातत्व विभाग का दावा है कि समुद्री जहाजों समेत पूर्व रोमन काल की पूरी-की-पूरी आबादी यहां दब गई थी।

कहा जाता है कि सन् 1998 के आसपास जब पीसा के दूर-दराज के इलाके में, सेन रॉससोर स्टेशन के पीछे रेलवे दफ्तरों के निर्माण के सिलसिले में बुलडोजरों के जरिए खुदाई की जा रही थी, नींव की खुदाई के दौरान, 30 फुट भूमि से नीचे लकड़ी का एक प्राचीन समुद्री जहाज देखा गया। फीरेरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टेफनो ब्रणीं की देखरेख में लम्बे-चौड़े क्षेत्र में खुदाई की गई और हाथ लगे रोमन काल के चार समुद्री जहाज। खुदाई के साथ-साथ जहाजों की संख्या बढ़ते-बढ़ते 6, फिर 9 और आखिर में 21 हो गई। ये सभी समुद्री जहाज लड़ाकू बताए जाते हैं और सन् 200 ईसा पूर्व से 500 के बीच के हैं।

इन समस्त जहाजों को पीसा स्थित नए संग्रहालय में संग्रहित किया गया है। जहाजों में कई हथियार, औजार, मानव अवशेष, कपड़े, तेल-लैम्ब और चमड़े की वस्तुएं भी प्राप्त हुई हैं। टुसकैनी के पुरातत्व सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर एंगलो का कहना है-'प्रमाण साक्षी है कि किसी जमाने में पीसा भी रोमन शहर था। आज पीसा समुद्री किनारे से 10 किलोमीटर दूर है, मगर 5वीं सदी में साढ़े तीन किलोमीटर दूर ही था।'

यह रहस्य ही है कि आज पीसा की मीनार के भूतों के तार किस तरह दफन शहर से जुड़े हैं। कहना गलत न होगा कि पीसा की मीनार संसार का आश्चर्य होने के अलावा न जाने कितने रहस्य अपने गर्भ में छिपाये हुए है।


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..... Pisa Ki Minar Ki Bhutaha kahani: Pretatma [ Ends Here ] .....

Team Hindi Horror Stories



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