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लेफ्टिनेंट का भूत हिंदी कहानी: Lieutenant Ka Bhoot Asli Hindi Kahani

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Asli Bhoot Ki Kahani Lieutenant Ka Bhoot

Lieutenant Ka Bhoot Asli Hindi Kahani
लेफ्टिनेंट का भूत असली हिंदी कहानी


ह घटना 21 जनवरी 1918 की है। वह डरावनी रात थी। आसमान में पूर्णिमा का चाँद घने काले बादलों में छिप गया था। चारों ओर सन्नाटा बिखरा हुआ था। कभी थोड़ी देर के लिए चाँद बादलों की ओट से निकलता तो दूर-दूर तक फैला शांत समुद्र रोम-रोम सिहरा जाता।


प्रथम विश्व युद्ध के दिन थे और इंग्लिश चैनल में एक जर्मन पनडुब्बी ब्रिटिश जलपोतों की टोह में घूम रही थी। उस पूर्णिमा की रात, वह कुछ ही देर हुए समुद्र के भीतर से ऊपर आई। समुद्री सतह का हाल देखने के लिए एक जर्मन पनडुब्बी का अफसर कार्ल इरिखमान डेक पर आया। अकस्मात उस अफसर की दृष्टि डेक पर खड़े एक व्यक्ति पर पड़ी तथा वह चौंककर कांप उठा।


पनडुब्बी तो अभी-अभी ऊपर आई थी, अतः डेक पर किसी के पहुंचने का सवाल ही नहीं उठता। फिर डेक पर आने का द्वार तो उसी ने खोला है। तब फिर पनडुब्बी के डेक पर कौन है ? 

उसने चीखकर पूछा-“तुम कौन हो? वहां क्या कर रहे हो?"


उस व्यक्ति ने मुड़कर अफसर की तरफ देखा। चाँद के धुंधले प्रकाश में अफसर को उस व्यक्ति का चेहरा परिचित-सा लगा। उसने दिमाग पर जोर देकर उसका नाम याद करना चाहा। पलभर पश्चात् उसे नाम याद आया, पर उसके साथ ही उसे लगा, जैसे वह चक्कर खाकर गिर पड़ेगा। डेक पर खड़े उस व्यक्ति का नाम था-“लेफ्नेिंट जे० फारेस्टेर"। पर वह तो कुछ माह पूर्व एक दुर्घटना में मारा जा चुका था। तो क्या वह जे० फारेस्टेर के प्रेत को देख रहा था? 


भयभीत तथा किंकर्तव्यविमूढ़ वह अफसर और कुछ कहता या करता, तब तक डेक पर खड़े प्रेत ने उसकी तरफ अंगुली से संकेत किया-जैसे उस पर आरोप लगा रहा हो, फिर अदृश्य हो गया।


जिस यू-65 पनडुब्बी पर फारेस्टेर का ये प्रेत देखा गया, वह फिर दोबारा यात्रा नहीं कर पाई। हुआ यह था कि जब यू-65 अपनी प्रथम यात्रा पर निकलने को हुई तो उस पर खाने-पीने के सामान के अलावा टारपीडो भी लादे गए। जिस वक्त ये टारपीडो पनडुब्बी से उतारे जा रहे थे तब वे फट पड़े। पनडुब्बी के चालक दल के पांच सदस्य मारे गए। लेफ्टिनेंट फारेस्टेर भी उनमें एक थे। टारपीडो के फटने से पनडुब्बी भी क्षतिग्रस्त हुई तथा उसे मरम्मत के लिए भेजा गया। युद्ध के दिन थे, इसलिए पनडुब्बी की जैसे-तैसे मरम्मत कर पुनः उसे सफर लायक बना दिया गया।


एक दिन अफसर ब्रिकमान तथा सीमैन पेटरसन पनडुब्बी का मुआयना करने पहुंचे तो उन्हें ही सबसे पहले फारेस्टेर का प्रेत दिखाई दिया। सीमैन पेटरसन तो उसे देखकर इतना डर गया कि नौकरी छोड़कर ही भाग गया। शीघ्र ही यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई कि पनडुब्बी में फारेस्टेर तथा उसके साथ मृत अन्य चार लोगों के प्रेत भी हैं तथा अब उस पर यात्रा करना खतरे से खाली नहीं।


एक पादरी को बुलवाकर पनडुब्बी को प्रेतबाधा से मुक्त किया गया, लेकिन लोगों के मन में फारेस्टेर तथा उसके साथियों के प्रेत का भय गलत नहीं था। पनडुब्बी के सवार प्रायः सभी लोगों को असमय मृत्यु का शिकार होना पड़ा था।


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