Interesting Daravana Kahani: आत्मा का प्रतिशोध [ Aatma ]

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Interesting Daravana hindi Kahani

Intresting Daravana Kahani: Aatma Ka Pratishodh
इंट्रेस्टिंग डरावना कहानी:  आत्मा का प्रतिशोध

"मैंने डैड को बहुत समझाकर देख लिया... । वह नहीं मान रहे हैं।" आंखों में आसू लिए व्हाइट की बांहों में लिपटी होप्स कह रही थी।


“तो चलो कोर्ट चलते हैं।" बेचैनी से उसके होंठ चूमता व्हाइट बोल उठा। 

“नो...नो...। मैं ऐसा नहीं कर पाऊंगी।"

वे दोनों इन पेड़ों और झाड़ियों के बीच खाली जगह पर एक-दूसरे को समझाने का प्रयास करते हुए परस्पर वार्तालाप कर रहे थे। उनकी गर्म सांसें मौसम की गर्मी को भी पीछे छोड़ रही थीं। उनकी मस्त सिसकियों से पेड़ भी अठखेलियां भरने लगे थे।


कुछ देर बार दोनों संतुष्ट हुए तो उसके सुर्ख होंठों को अपने होंठों से आजाद करता उदास व्हाइट बोला-“ठीक है, तुम्हारे बिना जीने की कोशिश तो करूंगा। लेकिन बस इतना करना कि अपना शरीर तो भले ही अपने पति पोंटिंग को सौंप देना, लेकिन अपना मन-मस्तिष्क मेरे लिए ही सुरक्षित रखना। मैं अपने आपको समझा लूंगा।"

कहते हुए व्हाइट ने होप्स को फिर अपनी बाहों में समेट लिया था।


निश्चित डेट को फादर ने होप्स व पोंटिंग के विवाह की रस्में सम्पन्न करायीं और व्हाइट देखता रह गया।


होप्स की भरपूर जवानी और अनूठा सौंदर्य देखकर पोंटिंग अपने भाग्य को सराह रहा था। होप्स के साथ वह अपने शानदार बंगले में रहने आ गया।


पोंटिंग तो बहुत खुश था। लेकिन होप्स व्हाइट को भूल नहीं पा रही थी। वह हर वक्त उसी को याद करती रहती थी। शरीर से तो होप्स पोंटिंग के पास अवश्य थी, लेकिन उसके दिल, दिमाग और प्रत्येक सांस में तो व्हाइट ही समाया था।


एक दिन पोंटिंग जब होप्स के साथ ससुराल आया हुआ था, तो वह टहलता हुआ एक पार्क में जा पहुंचा था। वहां एक धूर्त से चेहरे वाला युवक उसे मिला। जिसने थोड़ी देर इधर-उधर की बातों के पश्चात पूछा कि वह पोंटिंग वही है ना होप्स का पति?

हामी भरते हुए पोंटिंग ने सीधे स्वभाव पूछा-“क्या बात है भाई?" 

"बात जानोगे तो सांस लेना भी भारी हो जायेगा मिस्टर।" 

"क्या मतलब?" उसने हैरान भाव से पूछा।

“मतलब यह है कि होप्स अकेली तुम्हारी नहीं है।” बड़े राजभरे स्वर में उस शख्स ने कहा। 

“क्या मतलब है आखिर तुम्हारा?” सुनकर पोंटिंग उखड़ गया।

“सीधा सा...कि होप्स पूरी तरह तुम्हारी नहीं है।"

अपने को सहज रखने का यत्न करते पोंटिंग ने उस धूर्त को प्रश्नवाचक दृष्टि से देखते हुए पूछा- “तो...?"

“उसका एक अतीत और भी है, जो उससे आज भी जुड़ा है।" 

"क्या भला?” पोंटिंग की उत्सुकता आसमान पर जा पहुंची थी।

"उसका एक प्रेमी है...व्हाइट।” कहकर मानो उसने एक बम फोड़ डाला हो। 


पोंटिंग सुनकर सन्न रह गया। सपने में भी पोंटिंग को इस बात का गुमान नहीं था कि होप्स का कोई प्रेमी भी है। उस आदमी के साथ वह पास के बार में जा पहुंचा और स्कॉच लेकर उसे पिलाने लगा। स्कॉच पीकर तो वह बिना पूछे सब बकता चला गया।


होप्स और व्हाइट के संबंध कब से चले आ रहे थे? दोनों कहां-कहां पर मिलते थे? शराब के नशे में उसने पोंटिंग को सब कुछ बताया। यह भी कि दोनों आज भी मिलते हैं और सीमा तक पार करते हैं।


सब कुछ जानकर पोंटिग पर आसमान-सा टूट पड़ा। इतनी खूबसूरत औरत और ऐसा कुरूप सच! वह मानो बिखर कर रह गया। फिर गुस्से ने उसे एक शोला बना डाला। उसका दिल चाहा कि वह होप्स की हड्डी-पसली एक कर दे। यहां तक भी सोचने लगा कि उसका काम तमाम कर दे।


लेकिन होप्स को मारने का अंजाम भी उसे पता था। राज खुलने पर सजा तो होनी ही थी। होप्स के बाद की अरबों की दौलत भी उससे दूर चली जायेगी। बाप की अथाह सम्पदा की होप्स अकेली स्वामिनी थी।


पोंटिंग ने धैर्य रखना ही बेहतर समझा। क्योंकि होप्स को किसी प्रकार से भी छेड़ने का अर्थ था कि कारुं का खजाना खो देना।


उसने कुछ और सोच लिया था। ससुराल आने-जाने के दौरान अब उसकी दोस्ती व्हाइट से भी हो गयी थी। दोस्ती के कारण व्हाइट अब उसके घर भी आने लगा था। उसकी अनुपस्थिति में वह और होप्स अब घर में ही एक-दूसरे की प्यास बुझाने लगे थे।


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समय गुजरता रहा। फिर एक दिन...


सारे शहर में हलचल मच गयी। व्हाइट का मुर्दा शरीर शहर के एक निर्जन इलाके में पड़ा पाया गया।


पुलिस ने वहां पहुंचकर व्हाइट की लाश कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।


लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर जब व्हाइट की मौत का निश्चित समय पता चला तो होप्स चकराकर रह गयी। वह सोचने लगी कि ऐसा कैसे सम्भव है?

अब या तो डाक्टरों का आंकलन गलत था या फिर वह स्वयं गलत थी। क्योंकि जो समय डाक्टरों ने व्हाइट की मौत का बताया था, उसके बीस घंटे बाद वह और व्हाइट एक-दूसरे से मिले थे।

वह परेशान हो उठी। भला ऐसे कैसे सम्भव है? अपने मन की बेचैनी वह किसी से कह भी तो नहीं सकती थी। कहती भी तो किसे और क्या कहती, कैसे बता सकती थी कि व्हाइट और वह जिस समय मिले थे, डाक्टरों ने मौत का समय, उस समय से कई घंटे पूर्व का दिया है।


किसी भी तरह उसके लिए यह भेद खोलना सम्भव ही नहीं था कि शादी के बाद भी उसके और व्हाइट के शारीरिक संबंध थे।


पोंटिंग होप्स के सामने दुख जता रहा था-"डियर ! तुम्हारे मायके का एक युवक मेरा दोस्त था। उसकी बहुत निर्मम ढंग से हत्या कर दी गयी है। बड़े वहशियाना तरीके से मारा गया है बेचारे व्हाइट को। वह तो किसी से खास वास्ता भी नहीं रखता था निहायत सज्जन किस्म का आदमी था। उसकी तो शायद किसी से कोई रंजिश भी न थी।


भला होप्स क्या कह सकती थी? पोंटिंग की बात के जवाब में बस वह खामोश होकर ही रह गयी।


दिन पर दिन बीतते चले गये। लेकिन पुलिस की जांच का कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा था। जब व्हाइट की हत्या का राज नहीं खुल सका, तो अन्ततः केस क्लोज कर दिया गया।


धीरे-धीरे जिंदगी अपने ढर्रे से चलने लगी। व्हाइट और उसकी हत्या सब अतीत के अंधेरे में प्रायः खोकर रह गये।


⛔⛔⛔


एक दिन नहा-धोकर जब होप्स अपने बाल सुखा रही थी तो आश्चर्य से उसकी आंखें बुली की खुली रह गयीं। क्योंकि व्हाइट उसके सामने उसी मुस्कान के साथ खड़ा था, जिस पर वह मर मिटी थी।

होप्स हड़बड़ा कर बोली-“तुम... " 

“यस...मैं डार्लिंग।” वह मुस्कराया। 

“किंतु तुम्हारी तो... ।”


“हा! मेरी हत्या कर दी गयी है। इसलिए मेरी मुक्ति भी नहीं हुई है। और मैं सूक्ष्म शरीर से इसी दुनिया में बना हुआ हूं। उस दिन आखिरी बार जब हम-तुम मिले थे, तब भी मैं ऐसे ही था।"


होप्स कुछ चाहकर भी बोलने में परेशानी महसूस कर रही थी। मुश्किल से पूछा उसने-“तुम्हें किसने मारा है?"


"अभी इंतजार करो। सब जान जाओगी।" 

“किन्तु...।" 

"होप्स! माई डार्लिंग, फिर मिलेंगे...।" कह कर व्हाइट हवा में गुम जरूर इसमें कोई भेद है कि व्हाइट ने अपने हत्यारे का नाम नहीं बताया था। होप्स अपने विचारों में खोई हुई थी। कई दिन तक वह इस बारे में उधेड़बुन करती रही। लेकिन जब कोई नतीजा नहीं निकाल पाई तो उसने इस तरफ से अपना ध्यान ही हटा दिया।

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होप्स ने शादी के तीन साल बाद एक बेटे को जन्म दिया। बड़ा प्यारा और स्वस्थ था उसका नन्हां सा बेटा। होप्स और पोंटिंग दोनों उसे पाकर मानो निहाल हो उठे थे। उनका बेटा बड़ा होने लगा। पोंटिंग का दिल करता कि बेटे के लिए दुनिया भर के तोहफे जुटा दे। वह रोज नये खिलौने लाता।


उन्हीं दिनों जाने कैसे लोगों में यह चर्चा फैलने लगी थी कि व्हाइट को पोंटिंग ने मार डाला। कोई पति आखिर कैसे यह सब सहन करता कि उसकी अपनी पत्नी किसी गैर पुरुष का बिस्तर गर्म करती रहे! बस योजना बनाकर अवसर पाते ही उसने व्हाइट को मार डाला।


एक दिन पोंटिंग बेटे के साथ खेल रहा था।

गोल-मटोल, सुन्दर और बड़ा प्यारा बेटा था उसका। जिसे देखकर कोई गैर भी उसे खिलाने को मचल उठते। उसका तो यह अपना बेटा था। लेकिन तभी बेटे के मुंह से उसने विचित्र सी गुर्राहट सुनी। मानो कोई दरिन्दा दहाड़ा हो। चौंक कर उसने गौर से बेटे की तरफ देखा।

बेटा सामान्य भाव से मुसकरा रहा था। वही प्यारी मुसकान थी उसकी, जो एक नन्हें शिशु के पास ही सम्भव हो सकती है।

पोंटिंग ने उस गुर्राहट व दहाड़ को अपना भ्रम समझ लिया।

एक दिन बेटा खिलौनों में खेल रहा था। पोंटिंग सीढ़ियों से उतर कर नीचे की मंजिल पर आ रहा था।

तभी मानो किसी ने पोंटिंग की कमर पर पीछे से लात का एक भरपूर वार किया हो। इस प्रहार से वह सम्भल नहीं पाया और सीढ़ियों से धड़ाम से सीधा फर्श पर जा गिरा। उसकी कई पसलियां टूट गयी थीं। कई दिन तक वह अस्पताल में बेहोश पड़ा रहा था।


इसके बाद जब पोंटिंग ठीक होकर घर वापस आया तो जाने क्यों वह अपने बेटे से कतराने लगा। उसकी मासूम मुसकान भी उसे डराने लगी।


उसे याद आ जाता था कि पीछे से लगी लात से वह सीढ़ियों से फर्श पर जा गिरा था और उस समय आस-पास बेटे के सिवा कोई भी न था।


लेकिन उसे यह भी शक होता था कि भला ऐसा मासूम और नन्हां बालक उसे क्या ठोकर मार कर गिरायेगा?


उसने होप्स से अपना शक जताया तो वह शरारत से मुसकराकर बोली-“क्या बात करते हो पोंटिंग? तुम तो मेरी ही जान निकाल देते हो-फिर यह छोटा बच्चा क्या है तुम्हारे सामने!”


वह अपने प्यारे मासूम बच्चे को खिलाने में लग गयी और खामोश होकर पोंटिंग वहां से चला गया। उसे पता था कि होप्स तो एक जिद्दी और अपने बाप के प्यार में पली इकलौती युवती थी। लेकिन यह बात तो शायद कोई आम औरत भी स्वीकार करने को तैयार न होती।

पोंटिंग बेटे की तरफ से अब सावधान रहने लगा था। क्योंकि उस बच्चे की अचानक गुर्राहट और सम्भल कर सीढ़ियां उतरते समय लगी जोरदार लात वह भूल नहीं पा रहा था।

उस समय आस-पास कोई अन्य भी तो नहीं था जो ऐसी जोरदार लात उसे मार देता। अपना ही बेटा उसे अपनी आफत लगने लगा था। उसका बेटा एक दिन किचन में खेल रहा था और पोंटिंग किचन के पास से गुजर रहा था। 

पोंटिंग निगाह चुराकर वहां से आगे निकल लिया। वह कुछ ही कदम चला होगा कि कोई भारी वस्तु आकर उसके सिर पर जोर से पड़ी और खनन-खनन कर नीचे गिरी।


अब तो पोंटिंग का जो हाल हुआ, वह स्वयं ही जानता था। वह मानों अपने होश खो बैठा, क्योंकि उसने सिर पर आकर टकराने वाला एक भारी भगौना था। यह भगौना उस छोटे बालक के पास रखा देखा था उसने।

वह दर्द से ज्यादा भय से चिल्लाया- “अरे मर गया...बचाओऽऽ।” 

उसकी चीख सुनकर दौड़ती आयी होप्स ने पूछा- “क्या बात है पोंटिंग...।"


डर के मारे उसकी आवाज फंसी जा रही थी। फिर भी उसने बच्चे की तरफ संकेत करते हुए कहा- “तुम्हारा यह दुलारा...।"

सुनकर होप्स की हंसी छूट पड़ी-“क्यों तुम मेरे बेटे को बदनाम करने पर तुले हो?"


लेकिन जब पोंटिंग ने अपनी बात पर जोर दिया, तब उसने यही कहा-“देखो! तुम्हारे मन में जरूर कोई भ्रम समा गया है। अब ऐसा है कि बेटे को लेकर मैं कुछ समय के लिए डैड के पास चली जाती हूं।"


“ठीक है...ऐसा ही करो।” तुरन्त उसके मुंह से निकल पड़ा। बेटे को लेकर होप्स अपने डैडी के पास चली गयी।


लेकिन पोंटिंग आखिर कब तक घर में अकेला रह सकता था! नयी-नयी शादी थी उसकी। रह-रह कर पत्नी की यादें उसे बेचैन कर देते थे। कभी भी वह उत्तेजित हो उठता था। जब उससे नहीं रहा गया तो कार निकालकर पोंटिंग सीधे ससुराल में ही जाकर रुका।


मौका लगते ही उसने होप्स को अपने बाँहों में लपेट लिया और उसे चूमता हुआ बोला-“यार! वाकई तुम लाजवाब हो। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। मैं इतना परेशान हुआ तुम्हारे बिना तुम सोच भी नही सकती...।"


"ठीक है, मैं सब समझ गयी। अच्छा...चलो चलते हैं।" चंचल मुसकान बिखेरती होप्स ने तैयार होते हुए कहा।


उसी समय होप्स अपनी ससुराल से वापस आ गयी।

कुछ समय तो कोई ऐसी-वैसी घटना न हुई। सब कुछ सामान्य हो चला। पुराने हादसे से पोंटिंग भी बाहर आ गया  था। किन्तु बेटे से वह दूर-दूर ही रहता था।


लेकिन एक दिन अपने पति के बुरी तरह चिल्लाने की आवाज पर होप्स भागती हुई वहां पहुंची, जहां पर पोंटिंग चीख रहा था।


पास आकर होप्स ने पाया कि पोंटिंग दोनों हाथों से अपनी गर्दन को इस प्रकार घुमा रहा था कि मानो वह किसी से छूटने की कोशिश कर रहा हो। बिलकुल ऐसा दृश्य था कि किसी गला घोंटने वाले से वह बचाव करता लग रहा था।


हैरान-परेशान होप्स कुछ न समझ पाने वाले भाव से बोली-“क्यों चीख रहे हो पोंटिंग? आखिर क्या बात है?"


"व्हाइट मुझे मार डालेगा... । मुझे बचाओ होप्स.... ।” पोंटिंग होप्स को देखकर गिड़गिड़ा उठा।


"व्हाइट ?” होप्स घबरा गयी। 

"हां...हां...व्हाइट...मैंने ही उसकी हत्या की थी।" 

होप्स जैसे आसमान से गिर गयी हो उसे ऐसा झटका लगा-“तुमने व्हाइट का मर्डर किया था?" 

"हो...मैंने ही तुम्हारे प्रेमी व्हाइट को मार डाला था... ।” रोते हुए उसने जवाब दिया।


.“लेकिन यहां तो कोई नहीं है? तुम्हारा गला कौन दबा रहा है?" अपने क्रोध को पीने की कोशिश करती वह बोली।


भयभीत पोंटिंग की गिड़गिड़ाहट बढ़ गयी थी। वह अपनी गर्दन छुड़ाने का प्रयास करता हुआ फिर रिरियाया- “इसे रोको होप्स... । शायद तुम्हारे कहने पर मुझे माफ कर दे। हमारे बेटे के रूप में व्हाइट ही पैदा हुआ है...आह...।"


अभी होप्स कुछ बोल पाती कि उसके पहले ही जोरदार ठहाके के साथ एक आवाज गूंजी “यह जलील आदमी ठीक कह रहा है होप्स। मैं व्हाइट ही हूं। इसने मुझसे दोस्ती कायम की और एक दिन बहाने से इसने मुझे निर्जन स्थान पर बुलाकर छुरे से गोद डाला। मैं इससे प्रतिशोध ले रहा हूं... "


व्हाइट की आवाज खामोश होते ही पोंटिंग बिलबिलाकर हाथ-पांव फेंकने लगा। उसकी आंखें बाहर आ रही थी। जीभ काफी बड़ी होकर बाहर निकल चुकी थी।


थोड़ी देर बाद पोंटिंग निर्जीव होकर पड़ गया। व्हाइट ने अपना बदला ले लिया।


उसी समय हैरतजदा होप्स की आंखें ऊपर उठीं।


उसके सामने व्हाइट खड़ा था। उसके चेहरे पर संतोष के भाव थे। वह अपनी चिर परिचित मुसकान बिखेर रहा था।


होप्स को निहारते हुए वह बोला


"प्रतिशोध के लिए मैं ऊपर नहीं गया था। धरती पर ही अतृप्त फिर रहा था। होप्स! आज मैंने प्रतिशोध ले लिया है। मुझे भी ऊपर वाले की आज्ञा अब माननी ही होगी। मैं जा रहा हूं... । बस अब अगले जन्म में ही मिलेंगे। गुड बाय डार्लिंग।" बोलते-बोलते व्हाइट चुप हो गया और मुसकराता हुआ वातावरण में लुप्त हो गया।


होप्स पर जैसे कोई जादू हो गया हो। व्हाइट के स्वर उसके कानों में गूंज रहे थे। अब वह दिखाई नहीं दे रहा था।


थोड़ा होश सम्भला तो होप्स ने निगाह उस ओर उठायी, जहां पर उसका मासूम बच्चा खेल रहा था। लेकिन वहां पर तो बस उसके कपड़े ही पड़े हुए थे। बच्चा कहीं नहीं था।


होप्स के गले से एक चीख निकल गयी। बेहोश होकर वह फर्श पर गिरी और उसके प्राण चल पड़े व्हाइट की आत्मा के पीछे... ।

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..... Interesting Daravana Kahani: Aatma Ka Pratishodh [ Ends Here ] .....

Team Hindi Horror Stories

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