Aliens Ki Sachi Kahani: उड़नतश्तरी [ Udantashtari ]

Aliens Ki Sachi Kahani: Udantashtari
एलियंस की सच्ची कहानी: उड़नतश्तरी

Aliens-Ki-Sachi-Kahani-Udantashtari-ki-kahani-Aliens-Ki-Kahani-Kya-aliens-hote-hai-udantashtari-sach-mein-hoti-hai-kya-aliens hai-kya-aliens-sach-mein-hote-hai
Kya Aliens Hote Hai

शाम के साढ़े छह बजे बैटी एंडरसन रसोईघर में थी। उसके सात बच्चे और माता-पिता बगल के कमरे में बात कर रहे थे। उसका पति अस्पताल में एडमिट था। धीरे-धीरे अंधेरा छा रहा था। अचानक घर की बिजली गुल हो गई। उसी पल रसोईघर की खिड़की से आसमान पर लाल-गुलाबी अजीब-सी रोशनी दिखाई दी। गर्र-गर्र आवाज तेज होती गई।

परिवार के समस्त सदस्य खौफ से सहम गए।बैटी के पिता ने खिड़की से झांककर देखा-घर की तरफ पांच अजीबोगरीब प्राणी चले आ रहे थे।


उन प्राणियों ने लकड़ी के बंद द्वार को आसानी से चीरते हुए घर में प्रवेश किया-जैसे वहां कुछ हो ही न। अगले ही पल परिवार के सभी सदस्य मूर्छित हो गए। इन पांच प्राणियों में एक कप्तान था। 


कप्तान की लंबाई लगभग 5 फुट थी और बाकी उससे काफी छोटे कद के थे। उनका नाशपाती के आकार का विशाल सिर, बिल्ली की भांति गोल खूखार आंखें और बेहद सूक्ष्म नाक-कान थे। मुंह बंद था। सभी ने नीले रंग की पूरी तरह से ढकी हुई कपडे  पहन रखे थे। पेटी बंधी थी। उनके मात्र तीन अंगुली वाले हाथ थे, जिन पर दस्ताने थे। 

किसी अन्य लोक के विचित्र प्राणियों ने परिवार के सभी सदस्यों को अपनी गिरफ्त में ले लिया और खामोशी से बैटी को अपने साथ लेकर चल दिए। उनका यान घर के पीछे पहाड़ी के दूसरी तरफ खड़ा था। विमान का व्यास लगभग 20 फुट का होगा। लगता था मानो दो तश्तरियां आपस में जुड़ी हों। उड़नतश्तरी के ऊपरी हिस्से पर उसका नियंत्रण कक्ष था। 

देखते-ही-देखते यह उड़नतश्तरी एक अन्य विशाल यंत्र के साथ जा जुड़ी। वे प्राणी बैटी को इसमें बैठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले उड़े। वहां उसे अत्यधिक दर्द सहन करना पड़ा। अन्ततः रात दस बजकर चालीस मिनट पर दो विचित्र प्राणी बैटी को उसके घर वापस छोड़ गए। 

परिवार के अन्य सदस्यों के होशो-हवाश अभी तक उड़े थे। यूं लगता था मानो अंतरिक्ष के लोगों ने उनके मस्तिष्क पर अपना नियंत्रण कर रखा हो। किसी अन्य खगोलीय लोक से उड़नतश्तरी से आए प्राणियों द्वारा पृथ्वी के लोगों की जांच-पड़ताल की अनोखी घटना 25 जनवरी, 1967 को दक्षिण एशवर्नहम (मानचेस्टर) में हुई। 


आठ वर्ष के लंबे समय के पश्चात् सन् 1975 में, एक स्थानीय अखबार में उड़नतश्तरी पर समाचार छपा। साथ ही डॉक्टर जे० एलन हाएनेक ने पाठकों से अपील की कि वे उड़नतश्तरी संबंधी अपने निजी अनुभवों को छापने के लिए भेजें। इसी के तहत, बैटी एंडरसन के कथित अपहरण की खबर छपी। बैटी ने लिखा कि अपहरण के दौरान, उसे उड़नतश्तरी और उसके प्राणियों के सम्बंध में सब कुछ भुला देने की धमकियां दी गई। 

जनवरी, 1977 में पुनः इस मामले की तहकीकात आरम्भ हुई। सात सदस्यों का एक शोध दल गठित किया गया। लगभग एक वर्ष तक तहकीकात जारी रही। शोध की रिपोर्ट तीन पुस्तकों के 528 पृष्ठों में आई। शोध से प्रमाणित किया गया कि उड़नतश्तरियां फिर चर्चा में हैं। 


5 मार्च, 2004 को, मैक्सिको में उड़नतश्तरियों के दिखाई देने से सारी दुनिया में हंगामा खड़ा हो गया। मई, 2004 के दूसरे हफ्ते में, मैक्सिको वायुसेना ने 11 उड़नतश्तरियों की तस्वीरें जारी की हैं। 5 मार्च को खिंची तस्वीरों में स्पष्ट रूप से चमचमाते अनजान यानों को देखा जा सकता है। एक दूरसंवेदी विमान के पायलटों ने राडार के द्वारा इन्हें खींचा है।

कहते हैं कि पहले विमान के एक पायलट को सुदूर आकाश में कुछ चमचमाता नजर आया। वह हैरान रह गया। क्षण-भर में कुछ और चमचमाती चीजें और उभरने लगीं। माना जाता है कि राडार द्वारा उड़नतश्तरियों की इस कदर साफ तस्वीरें पहली बार खींची गई हैं। उड़नतश्तरियां वास्तविक थीं और समझदार व्यवहार करती बताई जाती हैं। विशेष रूप से जब विमान ने इनका पीछा किया, तो उड़नतश्तरियों ने सफाई से अपनी दिशा बदल ली।


ध्यान देने वाली बात है कि आज तक 140 देशों में 65 हजार से भी अधिक उड़नतश्तरियां देखी गई हैं। अमेरिकी उड़नतश्तरी शोध विभाग के पूर्व निदेशक डॉक्टर जे० ऐलन हाएनेक के अनुसार उड़नतश्तरी देखने की लगभग, एक हजार खबरें प्रति वर्ष दर्ज की जाती हैं। 

संभवतः पहली बार प्रमाणित उड़नतश्तरी 12-14 अगस्त, 1883 को मैक्सिको में देखी गई थी। उस दिन जाकरेस अंतरिक्ष शोधशाला के तत्कालीन निदेशक जास बानिला ने विभिन्न आकारों के करीब चार सौ ठोस पिंड सुदूर सूर्य के निकट घूमते हुए देखे। उसने उन उड़नतश्तरियों के फोटो भी खींचे थे।


उड़नतश्तरी देखने वालों में दुनिया का सबसे प्रसिद्ध व्यक्ति अमेरिका का भूतपूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर है। बीस अन्य व्यक्तियों के साथ जिमी कार्टर ने 6 फरवरी 1969 को सायं साढे सात बजे एक उड़नतश्तरी देखी थी। उस वक्त वे स्थानीय लायंस क्लब के सदस्यों की एक बैठक को संबोधित करने जा रहे थे। कार्टर का कहना था कि वह उड़नतश्तरी चांद से कुछ छोटी गोलाकार थी और देखते-ही-देखते उसका रंग नीले से लाल में बदल रहा था। उन्होंने उड़नतश्तरी को करीब 10-12 मिनट तक देखा था।


उड़नतश्तरियों पर विभिन्न शोधों से एक सच्चाई उभरकर सामने आयी कि पृथ्वी के अलावा किसी अज्ञात खगोलीय ग्रह से कुछ उड़नतश्तरियां एक साथ छोड़ी जाती हैं। इसलिए उड़नतश्तरियां धरती पर, दो-चार दिनों के अंतर पर, अलग-अलग स्थानों पर देखी जाती हैं। 


भारत में, 1980 के अक्टूबर महीने की 5, 7 और 8 तारीख को क्रमशः बिलासपुर (मध्य प्रदेश) लखनऊ (उ०प्र०) और पटना (बिहार) में उड़नतश्तरियां देखी गई। मानना है कि उड़नतश्तरी अपने साथ तूफान, चक्रवात और बाढ़ें लाती हैं । लगभग बीस वर्ष पूर्व अमेरिका में बहुत हो-हल्ला मचा । कुछ अमेरिकियों ने अदालत में मुकदमा दायर किया कि उड़नतश्तरियों से पकड़े गए नौ प्राणियों को डेटन में रिटपेटर्सन हवाई अड्डे पर कैद करके रखा गया है। किसी प्राणी को बेवजह कैद करना सरासर अन्याय है। इसलिए इन्हें तुरन्त मुक्त किया जाना चाहिए।


केस की फाइल के अनुसार सन् 1950 में, तीन 50 फुट व्यास की गोलाकार उड़नतश्तरियां मैक्सिको के समीप दुर्घटनाग्रस्त हालत में उतरी। इनमें से निकले नौ विचित्र प्राणियों को कैद कर लिया गया था। प्राणियों के सिर शेष शरीर की तुलना में काफी बड़े थे और आंखें काफी छोटी थीं। पूरे शरीर पर एक भी बाल नहीं था। अमेरिकी सुरक्षा मुख्यालय पेंटागन' ने मामले की बारीकी से छानबीन की मगर नतीजों को सार्वजनिक नहीं किया गया।


क्या उड़नतश्तरियों का बात सही है? 

पुरानी मान्यताओं के अनुसार हजारों वर्षों से, दूसरे ग्रहों से प्राणी पृथ्वी पर उतरते रहे हैं। कहा जाता है कि देवी-देवता आकाश से धरती पर आते हैं। और देवदूत, संत और भूत एक से दूसरे ग्रहों पर आते-जाते हैं। वैसे ही उड़नतश्तरियां भी धरती पर आती है, और अपने साथ दुसरे ग्रह के प्राणियों को भी लाती है। जिने हम एलियंस कहते है। 


💀🕱🕱🕱🕱🕱💀

✒️✒️✒️✒️✒️

.....

..... Aliens Ki Sachi Kahani: Udantashtari [ Ends Here ] .....

Team Hindi Horror Stories

No comments:

Powered by Blogger.