Horror Stories In Hindi - The Untold Secret Of Haunted Palace - Hindi Horror Stories - सच्ची घटना पर आधारित सबसे डरावनी कहानियाँ

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Monday, 9 July 2018

Horror Stories In Hindi - The Untold Secret Of Haunted Palace

The Untold Secret Of Haunted Palace

दोस्तों आज की horror story एक true incident पे बेस्ड है, जो की D.U के दो प्रोफ्फेसर के साथ हुआ था | वो दोनों Paranormal things, Ghosts पे विश्वाश नहीं करते थे, सो इन सब चीजों को जानने के लिए वे जोधपुर के किले में गए जो की राजस्थान में है| दोस्तों यह true scary story बहुत ही इंट्रेस्टिंग और डरावनी है | अइ होप की आपको ये horror story जरुर पसंद आएगा |

 Horror Stories In Hindi - The Untold Secret Of Haunted Palace
 Horror Stories In Hindi - The Untold Secret Of Haunted Palace


यह कहानी जोधपुर सिटी के एक किले की है | वह किला बहुत ही पुराना और बहुत दिनों से खाली था | उसे खाली देख कर उसमे ठेला, रिक्शाव चलाने वाले रहने लगे | वह palace देखने में बहुत ही big था | 

वह किला दो तला वाला था | निचे वाले फ्लोर पे वे सब रहते थे और अपर फ्लोर खाली रहता था | वहां रहने वालों का ऐसा माना था की वह फ्लोर पे कुछ भूतिया है | उनके अनुसार जब दिन में वो किले की छत पे जाते है, तो उन्हें ऐसा feel होता था जैसे की कोई उनको पीछे से आकर touch किया और उस किले के ग्राउंड फ्लोर या छत से बहुत से आदमियों का boot पहन कर चलने का sound आती थी|

किले में बहुत से गार्डन और फाउंटेन था | दोपहर और रात के समय वहां से बहुत सा विचित्र आवाज आता था | वह आवाज ऐसा लगता था जैसे की वहां बाहर गार्डन में बहुत सारे सिपाही चल रहे हों और ऐसा फील होता था जैसे की मनो कोई बड़े युद्ध की तयारी चल रहि हो | कुछ लोग upper वाले floor में रहना चाहए लेकिन उनके साथ कुछ अजीब सी incident हुई, उन सब incidents के बाद से किसी को फिर Upper वाले फ्लोर में रहने का हिम्मत नहीं हुआ |  

ये सब सारी कहानी बहुत ही जल्द फैल गया और ये बात डेल्ही यूनिवर्सिटी के दो प्रोफ्फेसर (विनोद सिंह और रमेश शर्मा ) को पता चला | वे दोनों भुत प्रेत या paranormal activites पे विश्वास नहीं करते थे | जब उन दोनों को ये बात का पता चला तो वे दोनों ने decide किया की वे खुद उस किले में जा कर इन सब story को wrong प्रूफ करेंगे |


जोधपुर किला जाने की लिए वे दोनों डेल्ही से निकल गएँ |  वे अपने साथ कैमरा, एक गन, टौर्च, कुछ बुक्स, रहने के लिए बेडशीट और जरुरी सामान साथ ले गए थे |


वे मॉर्निंग में उस palace में पहुंचे, morning के टाइम सब कोई अपने अपने वर्क पे जाने की तयारी कर रहा था और कुछ लोग evening के लिए तयारी कर रहे थे | उन लोगो से मिलकर वे दोनों कहे की हमलोग यहाँ रिसर्च करने आये है, की सच में यहाँ कुछ है भी की नहीं | हमलोग यहाँ थ्री days रुकेंगे आप लोग हमलोग को रुकने के लिए कोई space दे दीजिये और उसके बदले हमसे पैसे ले लीजियेगा | 

उन लोगो ने बोला की आप दोनों हमारे साथ ही निचे रुक जाइये | फिर उनलोगों ने वहां होने वाले सारी घटना के बारे में बताया | 

प्रोफ्फेसर ने बोला की हमलोग आज दिन में निचे रुक जायेंगे लेकिन night में हमें उपर ही सोना है, सो night में हमारे सोने के लिए उपर bed लगा देना |  यह बात सुनकर वे लोग बोले upper नहीं रुकिए क्यूंकि वहां पहले बहुत सारी  paranormal incidents हो चुकी है और ऐसे में हमलोग आपको ऊपर नहीं जाने देंगे |

लेकिन professors नहीं माने और ऊपर जाने का जिद कर के night में अपर फ्लोर पर ही ठहराने का व्यवस्था  करवा लिए |

वे दोनों दिन भर निचे और उपर छत पर घूमते रहे ताकि उन्हें कुछ दिखे या महसूस हो सके, लेकिन उस दिन आश्चर्यजनक रूप से कुछ भी नहीं हुआ और प्रोफ्फेसोर्स को यह विश्वास हो गया की यहाँ कुछ भी नहीं है | यहाँ की कहानी झूट है और ये सब निचे रहने वाले लोगों का किया हुआ है ताकि उस किले में कोई और आके रहने न लगे | लेकिन प्रोफेसोर्स उस रात वहीँ रुक कर देखना चाहते थे पुरे तरह से संतुस्ट होना चाहते थे |

धीरे धीरे दिन ढल गया और रात हो गयी | रात का खाना खाने के बाद वे दोनों उपर जाकर सोने की बात कहने लगे | निचे रहने वाले मजदूरों ने उनको रोकना चाहा ताकि वे उपर नहीं बल्कि निचे ही सोये | लेकिन प्रोफेसर नहीं माने और वे उपर वाले फ्लोर पे जाने लगे | मजदूरों ने तब प्रोफेसर को कहा की sir आप लोग तो हमारा बात नहीं मान रहे तो अब हम आपको no नहीं करेंगे, but आपको हमारा एक बात जरुर से मानना होगा - आप अपने साथ हमारा ये dog ले कर जाइये और कोई भी problem हो तुरंत वापस निचे आ जाइये गा |

प्रोफेसर ने उनकी बात मान लि और अपने साथ उस कुत्ते को भी उपर ले गए | उन दोनों के सोने के लिए खटाई बिछाई गयी थी | वे उस कुत्ते को खटाई के पाया में बांध दिया और वे दोनों late night तक बात  करते रहे लेकिन उस time तक कुछ नहीं हुआ और धीरे धीरे उन्हें नींद आने लगा और वे सो गए |


उन्हें सोये हुए थोडा ही time हुआ था की, तभी वहां बहुत जोरो की wind चलने लगी वहां की सारी windows आपस में टकराने लगी और उनके साथ जो डॉग था वो बहुत जोर जोर से भोंकने लगा | यह सब सुनकर उनमे से एक प्रोफेसर रमेश शर्मा का नींद टूट गया | जब उनका नींद टुटा तो उन्हें ऐसा  feel हुआ की कोई उसके खटाई पर आके बैठा और फिर खटाई चर का sound किया तभी वे उठ बैठे और इधर उधर देखा लेकिन देखा की खटाई और उस room में कोई नहीं है |


वहीँ दूसरी तरफ proff vinod singh अभी भी नींद थे और वह doggy बहुत तेज भोंक रहा था |

तभी प्रोफेसर रमेश को बूट पहने किसी आदमी के चलने की आवाज आ रही थी | वे टौर्च लेकर उठे, यह आवाज उपर छत की सीढियों से आ रहा था | वे उपर सीढियों के तरफ जाने लगे और  वे जैसे जैसे उपर जा रहे थे boot का sound तेज होते जा रही थी |


वो अब terrace पे थे, लेकिन वहां कोई भी नहीं था पर  अभी भी boot का sound आ रही थी, तभी अचानक उनको किसी ने बहुत जोरो से push किया और वे सीढियों से होते हुए निचे गिर गए | गिरने से उन्हें बहुत चोट आई और वे बेहोश हो गए |


प्रोफेसर विनोद सिंह उस समय एक सपना देख रहे थे की कोई उनको तलवार से मारने वाला है, तभी उनका नींद टूट गया | उनका जब नींद टुटा तो वो देखते है की सामने वाले बेड पे प्रोफेसर रमेश नहीं है और वो कुत्ता जो उन्हें मिला था वो मर चूका है | तभी उनको बहुत जोर से भाला पटकने का आवाज आने लगा | तभी उस रूम की सारी खिड़कियाँ आपस में टकरा कर टूटने लगी | यह देख कर प्रोफेसर विनोद बहुत ही डर गए |


तभी बूट पहने किसी आदमी का चलने का आवाज आने लगी | यह आवाज सामने गेट के पास से ही आ रही थी | विनोद सिंह बहुत घबरा गए वो जोर जोर से रमेश तुम कहाँ हो चिलाने लगे लेकिन रमेश का कोई रिप्लाई नहीं आया | धीरे धीरे बूट का आवाज बहुत तेज होने लगा और देखते ही देखते ऐसा लगने लगा की वह boot वाला आदमी रूम के बाहर door पर है |

विनोद सिंह यह सब देख कर उठ खड़े हुए | उन्होंने अपने बैग से अपने प्रोटेक्शन के लिए रिवाल्वर निकला और उसे लोड कर लिए | तभी वह boot वाला आदमी ठीक गेट के फ्रंट में आ जाता है | उसे देख विनोद सिंह की ऑंखें फटी की फटी रह गयी | वह आदमी दिखने में न ही आदमी था न ही जानवर | उसका लोअर बॉडी पार्ट आदमी के जैसा था और अपर बॉडी पार्ट शेर के जैसा था और उसके बॉडी से पूरा आर पर दिख रहा था ऐसा मानो जैसे की वह transparent glass का बना हो |

विनोद सिंह उसे अपने तरफ आता देख डर गए और अपने रिवाल्वर से तीन गोलियां उसके ऊपर दाग दियें | तभी वह विचित्र सा दिखने वाला आदमी उनके पास आया और उनको उठा कर खिड़की से बाहर फेक दिया | गोली की आवाज सुनकर निचे रहने वाले सारे मजदूर जाग गएँ और उनको खोजने के लिए उप्पेर की तरफ भागे |

ग्राउंड फ्लोर पर ही proff  रमेश थे और जब ऊपर जा कर उन्होंने देखा तो proff विनोद नहीं थे और उनका doggy मर चूका था लेकिन खास बात यह था की रूम पहले जैसा सामान्य था | वहां कोई टूट फुट नहीं दिख रहा था | कुछ देर खोजने के बाद उन्हें proff विनोद भी मिल गए |

उन दोनों को हॉस्पिटल le जाया गया |  प्रोफ्फेसर विनोद को तिन दिन के बाद होश आया वह तिन दिनों तक कोमा में रहे | होश आने पर उन्होंने यह सारी बात सबको बताई |

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