Horror Stories in Hindi - The Creepy Library - Hindi Horror Stories - सच्ची घटना पर आधारित सबसे डरावनी कहानियाँ

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Sunday, 8 July 2018

Horror Stories in Hindi - The Creepy Library

 Horror Stories in Hindi - The Creepy Library

दोस्तों यह horror story बहुत साल पहले की है | यह कहानी एक लड़के की है जिसे की किसी कारण से एक दिन देर रात तक एक लाइब्रेरी में रुकना पड़ गया था और उसे साथ जो कुछ भी हुआ वो काफी भयानक था |  उस लड़के की पूरी story जानने के लिए इस scary story को अंत तक पढना न भूले |

 Horror Stories in Hindi - The Creepy Library
 Horror Stories in Hindi - The Creepy Library


मेरे माँ पापा का लगातार ट्रान्सफर होते रहता था इसलिए हमें एक सिटी से दुसरे सिटी लगातार मूव्स करना पड़ता था | इसलिए मेरी पढाई अधिकांश बोर्डिंग स्कूल में हुई |

 मैं  अपने बोर्डिंग स्कूल का नाम किसी कारण से नहीं बताऊंगा, लेकिन मैं आपको यह जरुर बता सकता हूँ की यह इंडिया के पुराने school में से एक है | मेरे स्कूल में प्रत्येक छात्र को chess, poetry, समाचार, खेल, बागवानी इत्यादि जैसे विभिन्न क्लबों में से एक club को चुनना होता था। इसलिए मैंने poetry writing चुना और सभी poetry club के member के लिए एक अलग से library था और उस library के staff क्लब के ही member थे।

लाइब्रेरी two stories का था और काफी बड़ा, प्रत्येक सब्जेक्ट की किताबें,और बीच में चारों ओर book shelves से घिरा एक reading area था, मेरी story यहीं से शुरू होती है। जैसा कि मैंने आपको बताया है कि यह school बहुत ही  पुराना था, और जैसा की आप जानते ही जब कोई school बहुत पुराना हो तो वहां कहानियाँ भी बहुत अधिक होती है, तो ऐसी ही एक story यहाँ 50 के दशक के प्रारंभ में थी, independence से ताजा ताजा निकले कुछ लोग, school में घुस गए, जिसमें अभी भी कई British student पढ़ रहे थे, जिनके माता-पिता ने आजादी के बाद वापस जाने से इनकार कर दिया, उन्होंने country छोड़कर जाने से इनकार कर दिया, भले ही उनके पूर्वजों दूसरे country से थे। इसलिए इन बच्चों को library में पहुंचा दिया गया, और भीड़ ने बच्चो से भरी उस library को जला दी |

 लाइब्रेरी को rebuild किया गया था और सालों से यह छोटी library अच्छी देख रेख के कारण बड़ी library में तब्दील हो गयी।

तो एक रात लाइब्रेरियन की बेटी को flu हो गया था, और उस दिन लाइब्रेरियन को कुछ books को उसके सही place पर रखना था, इसलिए उसने मुझे कुछ घंटों के लिए लाइब्रेरी में हेल्प करने के लिए कहा और चूंकि यह शनिवार का दिन था और हम बोर्डिंग स्कूल के स्टूडेंट का लाइफ बोरिंग होता था हमारे पास वीकेंड पे कुछ करने को नहीं होता था। सो मैंने इस लाइब्रेरियन की मदद करने का फैसला किया, इसलिए 9:30 बजे एकदम अकेले, मैंने कुछ नेचर magazine से इंट्रेस्टिंग आर्टिकल  पढ़ने का फैसला किया, यह आर्टिकल जापानी लडको के बारे में था जिन्होंने बिना अंडे के अंडाकार जानवरों को विकसित करने का एक नया तरीका विकसित किया था |
तो मेरा weekend कुछ इस तरह का था |


लाइब्रेरी में कुछ घंटे तक वेट करने के बाद भी यहाँ कोई नहीं आया, तो मुझे लगा कि अब कोई भी  नहीं आएगा, और लाइब्रेरियन भी वहि बैठे बैठे सो गया था, इसलिए मैंने लाइब्रेरी को बंद करने और मेरे कमरे में वापस जाने का फैसला किया। जैसे ही मैं लाइब्रेरी के मेन गेट के पास पहुंचा तो मैं literature बुक shelves section के तरफ से किसी के चलने की आवाज सुनी, मैंने इसे check करने का फैसला किया। पहले मैंने आवाज लगाई, लेकिन कोई answer नहीं आया, और यह sure करने के लिए कि अन्दर कोई है तो नहीं मैं अंदर गया, क्योंकि लाइब्रेरी का यह सेक्शन में लाइटिंग उतनी अच्छी नहीं थी और अभी रात का मध्य था, इसलिए मैंने लाइब्रेरियन का torch ले लिया और वहां देखने चला गया |


पहली two row में कोई भी नहीं था, इसलिए मैं third row में चला गया,  मैं पहले से ही इसे खाली होने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन यह sure करने के लिए कि मैंने इसे check out किया है, तभी मैंने वहां एक new लड़का देखा, height में मुझसे थोडा छोटा था । वह मेरे club के रंग का t-shirt पहने हुए था, और reality में मैंने उसे अपने club में कभी नहीं देखा (club के सभी सदस्य एक ही hostel में रहते हैं), शायद new student होगा |

इसलिए मैंने उससे पूछा की क्या  तुम खो गए हो, और अगर तुम चाहोगे तो तुम्हे hostel तक वापस ले जाऊंगा। उसने कोई answer नहीं दिया, बस मुझे घूरता रहा, किसी कारण से वह मुझसे डरा हुआ था, यहां तक ​​कि उसका चेहरा pale हो गया था, या यह उसका colour complexion था, लेकिन मैं यह कह सकता था कि वह डर गया था। मैंने आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन अचानक यह feel किया कि मैंने really में उस jersey को कहीं देखा था।


मैं उसको normal करने के लिए उसका name पूछा, उसने इसका भी answer नहीं दिया, मैंने उसे अपने साथ hostel वापस चलने को कहा, लेकिन वह सिर्फ मुझे देख रहा था, और आखिर में जब मैं उससे सिर्फ One फीट दूर था, तो उसने जोर से चिल्लाया |

उसे चिलाते हुए एक झटके  में मेरी नज़र उसकी face पर गयी मैंने torch की light को उसकी face तरफ किया, मैंने देखा कि उसका मुंह से जीभ गायब था ... अब यह मेरी डरने की बारी थी, मैं तुरंत u turn लिया और चुप चाप वहां से जाने लगा, मूड कर पीछे भी नहीं देखा | मैं जो भी अभी देखा था उसपर मैं confused था, लेकिन मैं अभी भी मेरे पीछे उसके चलने की आवाज को सुन सकता था, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह मुझे follow कर रहा हो। जैसे ही मैं लाइब्रेरी से बाहर निकला, मुझमे लाइब्रेरी के gate को lock करने का साहस नहीं था। मैं अपने hostel वापस भाग गया, और जल्दी से अपने blanket के अंदर घुस गया , यह winter season थी और आम दिनों जैसा ठण्ड लगने के बजाये मुझे sweating हो रही थी, मैं उस night सो नहीं सका।


अगले दिन मैं लाइब्रेरियन के पास गया और उसे last night हुए सभी incident के बारे में बताया, और weirdly उन्हें इस बात का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा और उन्होंने मुझे लाइब्रेरी open छोड़ कर जाने के लिए नहीं डाटा |


 Finally जब मैं  घर वापस जा रहा था, तो मुझे याद आया मैंने उस Jersey को memorial में देखा था, जो उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन को मरने वाले बच्चों की memory में बनाई गयी थी | यह यादें आज भी मुझे disturb करती है |

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